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टकसाल शूटआउट केस में बरी अभय सिंह बोले साजिश के तहत फंसाया गया, MLC विनीत सिंह ने कहा- न्याय की जीत

 
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वाराणसी: शहर के बहुचर्चित 24 साल पुराने टकसाल सिनेमा शूटआउट केस में बुधवार को बड़ा फैसला सामने आया। एमपी-एमएलए कोर्ट ने सपा के बागी विधायक अभय सिंह, मिर्जापुर के एमएलसी विनीत सिंह समेत सभी 6 आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से पूर्व सांसद धनंजय सिंह को बड़ा झटका लगा है।

विशेष न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने 13 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज दोपहर करीब डेढ़ बजे सुनाया गया। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया।

अभय सिंह का बड़ा आरोप– राजनीतिक कुंठा में फंसाया गया

फैसले के बाद अभय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक दुर्भावना के चलते इस केस में फंसाया गया। जिस समय यह घटना हुई, वह अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस गाड़ी पर फायरिंग का दावा किया गया, उसका कोई स्पष्ट पता नहीं चल पाया।

विनीत सिंह बोले– देर है, अंधेर नहीं

एमएलसी विनीत सिंह ने कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि यह मुकदमा पूरी तरह फर्जी था और उन्हें जानबूझकर इसमें फंसाया गया।उन्होंने कहा कि यह एक सोची-समझी साजिश थी, लेकिन आखिरकार न्यायालय ने सच्चाई के आधार पर फैसला सुनाया। उन्होंने कहा, “न्याय के इस मंदिर में देर जरूर होती है, लेकिन अंधेर नहीं होता।”

क्या था पूरा मामला?

यह मामला 4 अक्टूबर 2002 का है, जब उस समय के निर्दलीय विधायक धनंजय सिंह अपने काफिले के साथ वाराणसी से जौनपुर जा रहे थे। आरोप था कि कैंट थाना क्षेत्र के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल के पास बोलेरो सवार अभय सिंह और उनके साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी।

इस हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर और ड्राइवर सहित कई लोग घायल हो गए थे। मामले में अभय सिंह, विनीत सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

पहले भी मिल चुकी थी राहत

इस केस से जुड़े गैंगस्टर एक्ट मामले में भी 29 अगस्त 2025 को अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया था। अब फायरिंग केस में भी सभी आरोपियों को क्लीन चिट मिल गई है।

कोर्ट परिसर में रही कड़ी सुरक्षा

फैसले को देखते हुए वाराणसी कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। करीब 350 से ज्यादा पुलिसकर्मी, 2 आईपीएस, 3 एसीपी और एक कंपनी पीएसी तैनात रही।

फैसले के बाद बयानबाजी तेज

फैसले के बाद अभय सिंह ने धनंजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक दुर्भावना के चलते फंसाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना के समय वह अस्पताल में भर्ती थे।