Movie prime

9 महीने की कड़ी ट्रेनिंग, तालियों की गूंज और गर्व के आंसू- 491 महिला सिपाहियों ने ली सेवा की शपथ

 
9 महीने की कड़ी ट्रेनिंग, तालियों की गूंज और गर्व के आंसू- 491 महिला सिपाहियों ने ली सेवा की शपथ
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

Varanasi : मोहित अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में रिजर्व पुलिस लाइन, कमिश्नरेट वाराणसी में 491 महिला प्रशिक्षु आरक्षियों की भव्य दीक्षांत परेड (पासिंग आउट परेड) गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुई। करीब 9 माह के कठोर आंतरिक एवं बाह्य प्रशिक्षण के बाद सभी प्रशिक्षु औपचारिक रूप से Uttar Pradesh Police में शामिल हुईं और राष्ट्रसेवा, कानून व्यवस्था एवं जनसुरक्षा के लिए तैयार हुईं।

अनुशासन और समन्वय का शानदार प्रदर्शन

समारोह के दौरान पुलिस आयुक्त ने परेड का निरीक्षण किया। 18 टोलियों ने परेड कमांडर प्रशिक्षु महिला आरक्षी रेनू के नेतृत्व में मार्च पास्ट करते हुए सलामी दी। इस दौरान महिला आरक्षियों ने अनुशासन, समर्पण, समन्वय और शारीरिक दक्षता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिससे पूरा परेड मैदान गौरवान्वित हो उठा।

परेड के बाद सभी महिला आरक्षियों को कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी, निष्पक्षता और जनसेवा के प्रति समर्पण की शपथ दिलाई गई। अपने संबोधन में पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति सेवा, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है।

c

महिला सशक्तिकरण पर जोर

उन्होंने कहा कि पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाएगी। साथ ही सभी आरक्षियों को निष्ठा और समर्पण के साथ कर्तव्य निभाने के लिए प्रेरित किया।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों का सम्मान

समारोह में प्रशिक्षण के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली महिला आरक्षियों को सम्मानित किया गया—

- सर्वांग सर्वोत्तम: रोशनी गुप्ता

- परेड कमांडर (प्रथम): रेनू

- द्वितीय: रोशनी गुप्ता

- तृतीय: रोशनी देवी

- बाह्य विषयों में सर्वोत्तम: रेनू

इसके अलावा विभिन्न समूहों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रशिक्षुओं को भी पुरस्कृत किया गया।

c

परिजनों में दिखा गर्व

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में परिजन भी मौजूद रहे। अपनी बेटियों को वर्दी में परेड करते देख उनके चेहरों पर गर्व और भावुकता साफ झलक रही थी। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया गया।

यह दीक्षांत परेड न केवल प्रशिक्षण पूर्ण होने का प्रतीक रही, बल्कि महिला सशक्तिकरण, अनुशासित पुलिसिंग और सुरक्षित समाज निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में यादगार बन गई।