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एडेड स्कूल-कॉलेजों में ‘जातिगत वर्चस्व’ की होगी जांच, इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त आदेश
 

 
 एडेड स्कूल-कॉलेजों में ‘जातिगत वर्चस्व’ की होगी जांच, इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त आदेश
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वाराणसी। प्रदेश के राज्य वित्त पोषित (एडेड) स्कूल-कॉलेजों की प्रबंध समितियों पर वर्षों से चले आ रहे कथित जातिगत और पारिवारिक वर्चस्व की अब जांच होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद प्रशासन ने वाराणसी मंडल के चार जिलों—वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर और चंदौली—के शिक्षा अधिकारियों को अंतिम अल्टीमेटम जारी किया है।

फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स वाराणसी मंडल के सहायक रजिस्ट्रार अनूप मिश्रा ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआइओएस) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को निर्धारित प्रारूप में एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

यह कार्रवाई धनराज सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से 28 जुलाई को दिए गए आदेश के अनुपालन में की जा रही है। मामले में अदालत ने प्रदेश के करीब 381 एडेड स्कूल-कॉलेजों की प्रबंध समितियों के कामकाज, कथित फर्जी चुनाव और सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, अधिकारियों पर बढ़ा दबाव

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा तथा रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स उत्तर प्रदेश को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है।

इसी क्रम में सहायक रजिस्ट्रार की ओर से चारों जिलों के संबंधित अधिकारियों को अनुस्मारक पत्र भेजा गया है। इससे पहले 10 अगस्त को भी संस्थानों से संबंधित आवश्यक जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अधिकारियों की ओर से रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण मामला लंबित रहा।

अब लखनऊ मुख्यालय से 18 अगस्त को मिले कड़े निर्देशों का हवाला देते हुए अधिकारियों को इसी सप्ताह हर हाल में रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। रिपोर्ट में देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

रिपोर्ट में दर्ज होगा किस जाति समूह का है वर्चस्व

हाईकोर्ट और शासन की ओर से निर्धारित विशेष प्रारूप में संस्थान का नाम, पंजीकृत समिति, पंजीकरण संख्या समेत कई जानकारियां मांगी गई हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बिंदु ‘प्रबंध समिति पर वर्चस्व रखने वाले विशिष्ट जाति समूह’ से जुड़ा है।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के संरक्षक रमेश सिंह के अनुसार, इस बिंदु को शामिल करने का उद्देश्य एडेड संस्थानों में लंबे समय से चले आ रहे कथित प्रशासनिक वर्चस्व और प्रबंधन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने लाना है।

आरोप लगते रहे हैं कि सरकारी अनुदान से संचालित कई स्कूल-कॉलेजों में चुनाव महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं और वर्षों से एक ही परिवार या जातीय समूह के लोग प्रबंध समितियों के महत्वपूर्ण पदों पर बने रहते हैं।

इन संस्थानों में शिक्षकों-कर्मचारियों की नियुक्ति, बजट के इस्तेमाल और अन्य प्रबंधकीय फैसलों में कथित पक्षपात को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

‘सरकारी पैसे से चलने वाली संस्थाएं किसी की निजी जागीर न बनें’

फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स वाराणसी मंडल के रजिस्ट्रार अनूप मिश्रा के मुताबिक, कोर्ट यह परखना चाहता है कि इन सोसाइटियों में समाज के सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है या नहीं।

उन्होंने कहा कि सरकारी धन से संचालित संस्थाएं किसी एक विशेष वर्ग या परिवार की व्यक्तिगत जागीर बनकर न रह जाएं, यह सुनिश्चित करना जरूरी है। निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

वाराणसी मंडल में कितने एडेड स्कूल-कॉलेज?
वाराणसी: 106
जौनपुर: 153
गाजीपुर: 90
चंदौली: 32

कुल: 381 एडेड स्कूल-कॉलेज