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न्यायिक व्यवस्था में उपेक्षा का आरोप, वाराणसी में अधिवक्ताओं के अधिकारों को लेकर बढ़ा असंतोष

 
न्यायिक व्यवस्था में उपेक्षा का आरोप, वाराणसी में अधिवक्ताओं के अधिकारों को लेकर बढ़ा असंतोष
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Varanasi : बार एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के चुनावी माहौल के बीच अधिवक्ता समाज के सम्मान, अधिकार और कार्य-संस्कृति को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। वाराणसी जजशिप में अधिवक्ताओं के स्वाभिमान, विधिक अधिकारों और पेशेवर गरिमा को लेकर असंतोष खुलकर व्यक्त किया जा रहा है।

इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिवक्ता शिवप्रकाश सिंह ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि अधिवक्ता समाज, जो संविधान की रक्षा और न्यायिक प्रक्रिया के सुचारु संचालन का एक अहम स्तंभ है, आज स्वयं उपेक्षा और असुरक्षा की स्थिति में खड़ा दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान, अधिवक्ता अधिनियम और माननीय उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों द्वारा अधिवक्ताओं को कई अधिकार और दायित्व सौंपे गए हैं, बावजूद इसके उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए अब तक कोई ठोस सरकारी नीति लागू नहीं हो सकी है।

जिला न्यायालय स्तर पर व्यवहार को लेकर नाराज़गी

वरिष्ठ अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि बीते कुछ वर्षों में जिला न्यायालय स्तर पर कुछ न्यायिक अधिकारियों द्वारा अधिवक्ताओं के प्रति कथित रूप से उपेक्षात्मक और अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों द्वारा स्थापित बाध्यकारी सिद्धांतों की अनदेखी करते हुए आदेश पारित किए जा रहे हैं, जिससे प्रभावशाली और सफेदपोश अपराधियों को लाभ मिल रहा है, जबकि गरीब और वंचित वादकारी न्याय से वंचित रह जाते हैं।

प्रस्ताव दिए गए, समाधान नहीं

शिवप्रकाश सिंह ने बताया कि सेंट्रल बार एसोसिएशन, बनारस बार एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्यों द्वारा इस संबंध में जिला न्यायाधीश को कई बार प्रस्ताव सौंपे गए, जो अभिलेखों में दर्ज हैं, लेकिन आज तक न तो उन पर कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही संतोषजनक जवाब मिला।

ग्रेविएंस कमेटी पर सवाल

उन्होंने Ex-Captain Harish Uppal बनाम भारत संघ मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अधिवक्ताओं की हड़ताल पर शर्तों के साथ रोक लगाते हुए उच्च और जिला स्तर पर Grievance Redressal Committee के गठन का निर्देश दिया था। आरोप है कि वाराणसी जजशिप में ये समितियां केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं और अधिवक्ताओं की समस्याओं का समाधान प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है।

सोच-समझकर प्रतिनिधि चुनने की अपील

बार चुनाव के मद्देनज़र वरिष्ठ अधिवक्ता शिवप्रकाश सिंह ने अधिवक्ता समाज से अपील की कि वे जाति, धर्म और भावनात्मक आग्रहों से ऊपर उठकर ऐसे प्रतिनिधियों का चयन करें, जो अधिवक्ताओं के सम्मान, स्वाभिमान और विधिक अधिकारों की मजबूती से रक्षा कर सकें।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अधिवक्ता समाज आत्ममंथन करे और ऐसा नेतृत्व चुने, जो जिला प्रशासन, न्यायिक और संवैधानिक मंचों पर अधिवक्ताओं की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाए और समाज की सामूहिक छवि को सुदृढ़ बनाए।