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CJP Protest के बीच चुनाव आयोग का बड़ा कदम, Form-7 को लेकर तय किए नए नियम, जानें क्या बदला

 
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देशभर में ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने फॉर्म-7 को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस फॉर्म का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम को हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। आयोग की ओर से उठाए गए इस कदम का उद्देश्य मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाए जाने की आशंका को दूर करना बताया जा रहा है।

यह मुद्दा ऐसे समय में चर्चा में है, जब सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) समेत विभिन्न संगठनों की ओर से मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाए गए हैं कि कुछ मामलों में राजनीतिक लाभ के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा कर मतदाताओं के नाम हटवाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, ऐसे आरोपों की पुष्टि संबंधित मामलों के तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही की जा सकती है।


क्या है फॉर्म-7 और इसका इस्तेमाल कब होता है?

फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम को हटाने के लिए दावा या आपत्ति दर्ज कराने में किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, किसी मतदाता की मृत्यु हो जाने, उसके संबंधित पते पर सामान्य रूप से निवास न करने या किसी अन्य निर्धारित आधार पर नाम हटाने की मांग की जा सकती है। मतदाता सूची में किसी प्रविष्टि को लेकर आपत्ति दर्ज कराने के लिए भी इस फॉर्म का उपयोग किया जाता है।

हालांकि, केवल आवेदन जमा कर देने से किसी का नाम मतदाता सूची से नहीं हट जाता। संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियों की जांच करनी होती है।


फॉर्म-7 को लेकर क्या हैं प्रमुख निर्देश?

फॉर्म-7 के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से कुछ अहम बदलावों की चर्चा हो रही है। इनमें एक व्यक्ति की ओर से जमा किए जाने वाले आवेदनों की संख्या सीमित करने, आवेदन पर मूल हस्ताक्षर अनिवार्य करने और शिकायतकर्ता की पहचान का सत्यापन करने जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं।

दिए गए विवरण के मुताबिक, विशेष पुनरीक्षण अवधि (SSR) के दौरान एक मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म और सामान्य दिनों में हर महीने अधिकतम पांच फॉर्म जमा कर सकेगा। इसके अलावा, हस्ताक्षर की मुहर के बजाय हाथ से किए गए मूल हस्ताक्षर और शिकायतकर्ता की पहचान का मतदाता सूची के रिकॉर्ड से मिलान करने की बात कही गई है।

ध्यान देने वाली बात: इन संख्यात्मक सीमाओं और निर्देशों को लागू नियम मानने से पहले निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आदेश या संबंधित अधिसूचना से इनकी पुष्टि करना जरूरी है।


गलत शिकायत करने पर हो सकती है कार्रवाई

मतदाता सूची में गलत जानकारी देने या किसी का नाम हटवाने के लिए जानबूझकर झूठी शिकायत करने के मामले में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत निर्धारित परिस्थितियों में गलत घोषणा करने पर एक साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

इसलिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल केवल वास्तविक और उचित आधार पर ही किया जाना चाहिए। किसी मतदाता के नाम को हटाने की मांग करने वाले आवेदन की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना जरूरी है।


मतदाताओं के लिए क्या है जरूरी?

मतदाताओं को सलाह है कि वे अपनी जानकारी मतदाता सूची में जांचते रहें। अगर किसी का नाम गलत तरीके से हटाया गया है या नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर कोई आपत्ति है, तो वह संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी से संपर्क कर सकता है और निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज करा सकता है।