पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर को राहत, जिला जज की अदालत से मिली जमानत
वाराणसी की जिला जज अदालत ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचना प्रसारित करने के मामले में आजाद सेना अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राहत दी।
वाराणसी: इंटरनेट मीडिया पर भ्रामक व गलत सूचना प्रसारित करने के मामले में आजाद सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को शुक्रवार को बड़ी राहत मिली। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने उनकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुज यादव ने अदालत को बताया कि अमिताभ ठाकुर के खिलाफ राजनीतिक विद्वेष और शासन-प्रशासन के दबाव में मुकदमा दर्ज कराया गया है। उन्होंने दलील दी कि आरोपित पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं और प्रदेश सरकार की नीतियों व भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें जबरन सेवा से बर्खास्त किया गया था।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि अमिताभ ठाकुर अपने सामाजिक संगठन के माध्यम से देश और प्रदेश में कानून-विरोधी गतिविधियों, सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं से जुड़े भ्रष्टाचार को उजागर करते रहे हैं। उनके एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर किया गया पोस्ट किसी व्यक्ति की मान-प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक के रूप में विधिसम्मत जांच की मांग के तहत सम्मानजनक भाषा में किया गया था।
वहीं अभियोजन पक्ष और वादी के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि अमिताभ ठाकुर के खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और उनकी हिस्ट्रीशीट भी तैयार है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अमिताभ ठाकुर को जमानत प्रदान कर दी।
उल्लेखनीय है कि वाराणसी निवासी हिंदू वाहिनी के नेता एवं वाराणसी विकास प्राधिकरण के मानद सदस्य अंबरीश सिंह भोला ने 9 दिसंबर को चौक थाने में अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर और एक अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया गया था कि 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने एक्स अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट कर कफ सिरप मामले में बिना किसी ठोस साक्ष्य के भ्रामक आरोप लगाए थे।
