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आयुष इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 7,500 मानदेय पर नाराजगी; 25 हजार करने की मांग
 

 
 आयुष इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 7,500 मानदेय पर नाराजगी; 25 हजार करने की मांग
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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के सरकारी आयुष चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत इंटर्न डॉक्टरों ने मानदेय बढ़ाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने लंबे समय से मानदेय में संशोधन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की।

इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे सरकारी आयुष अस्पतालों में मरीजों की सेवा के साथ-साथ 24 घंटे की ड्यूटी, रात्रि ड्यूटी और बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें वर्ष 2011 से महज ₹7,500 प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है।

15 साल से नहीं बढ़ा मानदेय

डॉक्टरों के मुताबिक पिछले करीब 15 वर्षों से उनके मानदेय में कोई संशोधन नहीं हुआ है। मौजूदा मानदेय के हिसाब से एक इंटर्न डॉक्टर को प्रतिदिन लगभग ₹250 ही मिलते हैं। उनका कहना है कि वर्तमान महंगाई और बढ़ती जरूरतों के बीच इतनी कम राशि में गुजारा करना मुश्किल है। लंबे समय से मानदेय में बढ़ोतरी नहीं होने के कारण इंटर्न डॉक्टर आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।

पड़ोसी राज्यों का दिया उदाहरण

इंटर्न डॉक्टरों ने दूसरे राज्यों में मिल रहे मानदेय का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में ₹27 हजार, दिल्ली में ₹26,500 और राजस्थान में ₹23,500 प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। इसके मुकाबले उत्तर प्रदेश में केवल ₹7,500 मिलना बड़ी आर्थिक असमानता है।

डॉक्टरों ने राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग की गाइडलाइन और समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के अनुरूप मानदेय में समानता लागू करने की मांग की है।

₹25 हजार मानदेय की मांग

इंटर्न डॉक्टरों की प्रमुख मांग है कि आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति के इंटर्न डॉक्टरों का मानदेय बढ़ाकर कम से कम ₹25 हजार प्रतिमाह किया जाए।

डॉक्टरों का दावा है कि मानदेय बढ़ाने से संबंधित फाइल पिछले कई महीनों से वित्त विभाग और आयुष विभाग के बीच लंबित है। उन्होंने शासन से मामले में तत्काल निर्णय लेते हुए मंत्रिमंडल के स्तर से शासनादेश जारी करने की मांग की है।

7 सितंबर को पैदल मार्च की चेतावनी

इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि 3 सितंबर का प्रदर्शन केवल सांकेतिक शुरुआत है। यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 7 सितंबर को राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय, चौकाघाट से जिलाधिकारी कार्यालय वाराणसी तक शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला जाएगा।