5 दिन काम, 2 दिन छुट्टी की मांग पर बैंक यूनियनों का देशव्यापी शक्ति प्रदर्शन, वाराणसी में भी दिखा विरोध
वाराणसी: बढ़ते कार्यभार, स्टाफ की कमी और मानसिक तनाव के बीच बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग, सप्ताह में पांच कार्यदिवस की प्रणाली को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर आज देशभर में एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल चल रही है। इस हड़ताल से सरकारी बैंकों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है, जबकि निजी बैंक प्रभावित नहीं हुए हैं।
UFBU, जो नौ प्रमुख बैंक यूनियनों का संयुक्त मंच है, ने 23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई सुलह बैठक के विफल रहने के बाद यह हड़ताल बुलाई। यूनियनों का कहना है कि भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ पहले हुए द्विपक्षीय समझौतों में इस मांग पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बार-बार दिए गए आश्वासन केवल कागजी बनकर रह गए हैं, जिससे बैंक कर्मियों में गहरी निराशा फैली हुई है।
वाराणसी में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा के समक्ष शांतिपूर्ण धरना और हड़ताल आयोजित की गई। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन (वाराणसी अंचल) के महामंत्री कामरेड मनोज सिंह के नेतृत्व में अरुण कुमार, रामाश्रय राम, अमरेंद्र कुमार, पंकज कुमार, पंकज राय, अभय मिश्र, रघुवर तिवारी, पीएन सिंह, अश्विनी सिंह सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए। वक्ताओं ने सरकार से अपील की कि बैंक कर्मियों के कार्य-जीवन संतुलन, मानसिक स्वास्थ्य और सेवाओं की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए 5-दिवसीय प्रणाली शीघ्र लागू की जाए।
चंद्रा टावर स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जोनल कार्यालय पर भी UFBU के आह्वान पर एक दिवसीय प्रदर्शन हुआ, जिसका नेतृत्व भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के जिला अध्यक्ष राजीव कुमार सिंह ने किया। विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। राजीव कुमार सिंह ने कहा कि सीमित संसाधनों और स्टाफ की भारी कमी के बावजूद कर्मचारी पूरी निष्ठा से जनता की सेवा कर रहे हैं। 5-दिवसीय प्रणाली से कार्यकुशलता और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
यूएफबीयू से जुड़े पदाधिकारियों—सुंदर लाल, अमित वत्स, शुभम मिश्रा, मानवेंद्र सिंह, चंद्रभूषण, संतोष राय आदि ने एक स्वर में मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कई सरकारी विभागों और विदेशी देशों में पहले से ही यह व्यवस्था लागू है, ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र में भी इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा। देशभर में बैंक कर्मचारियों की यह हड़ताल बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे न केवल कर्मियों का कार्य-जीवन संतुलित होगा, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
