BHU का 111वां स्थापना दिवस: बसंत पंचमी पर ज्ञान, परंपरा और संकल्प का भव्य संगम
वाराणसी स्थित बीएचयू का 111वां स्थापना दिवस बसंत पंचमी पर श्रद्धा और वैदिक विधि से मनाया गया। कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने हवन-पूजन कर शिक्षा, शोध और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का आह्वान किया।
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का 111वां स्थापना दिवस शुक्रवार को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के साथ मनाया गया। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर परिसर में स्थित सरस्वती मंदिर के समीप कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से हवन-पूजन एवं पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के वरिष्ठ अधिकारी, पदाधिकारी, शिक्षकगण, चिकित्सक, कर्मचारी और अन्य गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्सव का माहौल देखने को मिला। मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि की कामना की गई।
स्थापना दिवस और बसंत पंचमी की शुभकामनाएं देते हुए कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और नए संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने कहा, “हमें यह सोचना होगा कि विश्वविद्यालय की उन्नति में हम व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से क्या योगदान दे सकते हैं। शिक्षा, अनुसंधान, चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में बीएचयू को और सशक्त बनाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।”

कुलपति ने बीएचयू की स्थापना के मूल उद्देश्य- राष्ट्र निर्माण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण को याद करते हुए कहा कि आज भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए नवाचार, अनुशासन और समर्पण पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता को और मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। हवन-पूजन के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया और सभी ने एक-दूसरे को बसंत पंचमी की शुभकामनाएं दीं।
गौरतलब है कि मां सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी के दिन ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी, जिससे यह पर्व बीएचयू के लिए विशेष महत्व रखता है। हर वर्ष इस अवसर पर विश्वविद्यालय में श्रद्धा, परंपरा और शिक्षा के संगम का अनुपम दृश्य देखने को मिलता है।
