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BHU Institute of Science में बड़े फैसले: 2026-27 सत्र से छात्रों को मिलेंगे नए स्किल कोर्स और ऑप्शनल सब्जेक्ट 

BHU के विज्ञान संस्थान ने 2026-27 सत्र से NEP के तहत कई बड़े अकादमिक बदलावों को मंजूरी दी है। छात्रों को नए स्किल कोर्स, वैकल्पिक विषय और इंटर-डिसिप्लिनरी पढ़ाई का मौका मिलेगा। साथ ही आयुर्वेद पाठ्यक्रमों में संशोधन, जूलॉजी विभाग में रिसर्च ट्रेनिंग सेंटर और संगीत व पीएचडी नियमों में बदलाव किए गए हैं।

 
BHU Institute of Science
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वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के विज्ञान संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को और अधिक लचीला और छात्र-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। संकाय की बैठक में छात्रों को कौशल विकास, शोध और शिक्षण प्रशिक्षण के नए अवसर देने पर सहमति बनी।

बैठक में बीएससी (ऑनर्स) और बीएससी (ऑनर्स विद रिसर्च) के छात्रों के लिए स्किल एन्हांसमेंट कोर्सेज के चयन की प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया गया। नए सत्र से इन पाठ्यक्रमों का एकमुश्त आवंटन किया जाएगा, जिससे छात्रों को बार-बार चयन की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।

छात्रों को मिलेगा ऑप्शनल सब्जेक्ट चुनने का विकल्प

प्रस्ताव के अनुसार स्किल एन्हांसमेंट कोर्स अब एक वैकल्पिक विषय की पात्रता भी पूरी करेगा। इससे छात्रों का शैक्षणिक बोझ कम होगा और उनकी दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही छात्रों को अपने आवंटित माइनर विषय के अलावा किसी अन्य वैकल्पिक वैकेशनल माइनर विषय को चुनने की अनुमति देने का प्रस्ताव भी पारित किया गया है। अकादमिक परिषद से स्वीकृति मिलने के बाद यह व्यवस्था लागू की जाएगी।

इस निर्णय से छात्रों को अंतर-विषयी (Interdisciplinary) शिक्षा प्राप्त करने और अपनी पसंद के कौशल क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलेगा।


जूलॉजी विभाग में बनेगा टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर

विज्ञान संस्थान के जूलॉजी (प्राणि विज्ञान) विभाग में एक विशेष केंद्र स्थापित करने को भी मंजूरी दी गई है। इस केंद्र का नाम “टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर इन यूजिंग ड्रोसोफिला” होगा।
इस केंद्र में शिक्षकों को आनुवंशिकी और जैविक अनुसंधान में ड्रोसोफिला (फल मक्खी) के उपयोग के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह केंद्र विभाग में उपलब्ध संसाधनों और वित्तीय व्यवस्था के आधार पर संचालित होगा। इसके संचालन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाएगी, जिसमें जूलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष अनिवार्य रूप से शामिल होंगे।

आयुर्वेद पाठ्यक्रमों में भी होगा बदलाव

अकादमिक परिषद की बैठक में राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) के नए मानकों के अनुरूप आयुर्वेद संकाय के पाठ्यक्रमों में बदलाव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत बीएएमएस और एमडी-एमएस स्तर के पाठ्यक्रमों में संशोधन किया जाएगा।

•    बीएएमएस तृतीय प्रोफेशनल के लिए नया सिलेबस लागू होगा
•    पीजी कोर्सेज में अक्टूबर 2024 के राजपत्र के अनुसार प्रथम से छठे सेमेस्टर तक के सिलेबस में बदलाव किए जाएंगे

शालक्य तंत्र विभाग में दो अलग एमएस प्रोग्राम

शालक्य तंत्र विभाग में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। विभाग में अब दो अलग-अलग विशेषज्ञता वाले एमएस कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
इनमें शामिल हैं-
•    एमएस (शालक्य तंत्र – नेत्र)
•    एमएस (शालक्य तंत्र – कर्ण, नासा, मुख)
यह व्यवस्था आगामी निर्देशों के अनुसार लागू की जाएगी।

संगीत पाठ्यक्रमों के कोड में बदलाव

महिला महाविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों में संचालित संगीत पाठ्यक्रमों को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए भी कई फैसले लिए गए हैं।
प्रदर्शन कला संकाय अब एमडी, एसईसी और वीओसी पाठ्यक्रमों के लिए एक समान कोर्स कोड प्रणाली अपनाएगा।
वोकल (गायन) के मेजर और माइनर कोर्सेज के कोड अब AVO के स्थान पर CVO से शुरू होंगे। इसके अलावा नृत्य अनुभाग द्वारा संचालित स्किल एन्हांसमेंट कोर्सेज की रूपरेखा में भी संशोधन किया गया है। माइनर पाठ्यक्रमों में लेयर्ड कंटेंट (स्तरित विषयवस्तु) और नए क्रेडिट वितरण को शामिल किया जाएगा।

हिंदू अध्ययन पीएचडी कार्यक्रम में भी संशोधन

बैठक में हिंदू अध्ययन पीएचडी कार्यक्रम के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। अब हिंदू अध्ययन को ही मुख्य विषय माना जाएगा और इसके लिए कोई अन्य संबद्ध (एलाइड) विषय मान्य नहीं होगा।
इसके साथ ही पीएचडी सीटों की अधिकतम संख्या 25 तक सीमित कर दी गई है। विभाग से संबद्ध एडजंक्ट फैकल्टी को केवल एक पीएचडी सीट दी जाएगी, जिसे उनके मूल विभाग से अतिरिक्त सीट के रूप में माना जाएगा।