BHU ट्रॉमा सेंटर केस: गलत सर्जरी से मौत पर रिपोर्ट, डॉक्टरों को मिली क्लीन चिट, स्टाफ जिम्मेदार
वाराणसी के IMS BHU ट्रॉमा सेंटर में गलत सर्जरी से हुई महिला की मौत मामले में जांच रिपोर्ट सामने आई है। 13 पेज की रिपोर्ट में डॉक्टरों को क्लीन चिट देते हुए स्टाफ को जिम्मेदार ठहराया गया है। पीड़ित परिवार ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
वाराणसी: BHU के आईएमएस ट्रॉमा सेंटर में हुई कथित गलत सर्जरी और उसके बाद महिला की मौत के मामले में गठित दूसरी जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। करीब 13 पन्नों की इस रिपोर्ट में डॉक्टरों की लापरवाही का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इसके बजाय वार्ड से ऑपरेशन थिएटर तक मरीज को ले जाने वाले कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया है।
डॉक्टरों को क्लीन चिट, स्टाफ की भूमिका पर उठे सवाल
जांच रिपोर्ट के मुताबिक सीनियर और जूनियर डॉक्टरों को इस पूरे मामले में जिम्मेदार नहीं माना गया है। समिति ने स्पष्ट किया कि घटना के लिए वह कर्मचारी जिम्मेदार है, जो 7 मार्च को मरीज को वार्ड से ओटी तक लेकर गया था। यह रिपोर्ट प्रो. अजीत सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने तैयार की, जिसने तीन बैठकों के बाद अंतिम निष्कर्ष निकाला।
कैसे हुई बड़ी लापरवाही
एक मरीज, दो सर्जरी और मौतबलिया निवासी 71 वर्षीय राधिका देवी को 24 फरवरी 2026 को स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर की समस्या के चलते न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया था। वे बेड नंबर 29 पर भर्ती थीं और उनका इलाज डॉ. अनुराग साहू की देखरेख में चल रहा था।
7 मार्च को उन्हें ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, लेकिन यहां गंभीर चूक सामने आई। न्यूरो सर्जरी की जगह ऑर्थो विभाग के डॉक्टरों ने उनकी जांघ में चीरा लगा दिया। जब सर्जरी के दौरान हड्डी सामान्य पाई गई, तब टीम को शक हुआ और पता चला कि जिस मरीज की जांघ में चोट थी, वह राधिका देवी नहीं हैं। इसके बाद उन्हें तुरंत ओटी से बाहर किया गया।
दोबारा सर्जरी के बाद भी नहीं बची जान
इस घटना के करीब 10 दिन बाद, 18 मार्च को न्यूरो सर्जरी टीम ने सही ऑपरेशन किया। हालांकि, 12 दिनों के भीतर दो बार सर्जरी झेलने के बाद 27 मार्च को राधिका देवी की मौत हो गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
परिजनों ने उठाए सवाल, जांच पर भी जताई आपत्ति
मृतका के पोते मृत्युंजय पाल ने पूरे मामले की शिकायत आईएमएस निदेशक और कुलपति से की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के दौरान उनकी बातों को सही तरीके से नहीं सुना गया और उनसे कोई दस्तावेज भी नहीं लिए गए। उन्होंने कहा कि अब जब रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, तो उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं दी गई है और वे फिर से कुलपति और निदेशक को पत्र लिखकर रिपोर्ट मांगेंगे।
कमेटी ने सभी संबंधितों से मांगा था जवाब
जांच समिति ने ऑर्थो और न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों के साथ-साथ ऑपरेशन थिएटर में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। तीन बैठकों के बाद समिति ने अपनी 13 पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर बंद लिफाफे में निदेशक को सौंप दी।
