प्रेमचंद के विचारों पर काशी विद्यापीठ में मंथन, साहित्य से समाज को जोड़ने पर जोर
Varanasi : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के हिंदी एवं अन्य भाषा विभाग के तत्वावधान में शुक्रवार को मुंशी प्रेमचंद जयंती के अवसर पर विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों और शोधार्थियों ने प्रेमचंद के साहित्य, उनकी विचारधारा और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. अनुराग कुमार ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी सामाजिक यथार्थ और मानवीय मूल्यों का सशक्त दस्तावेज है। वहीं प्रो. निरंजन सहाय ने कहा कि किसी भी रचनाकार की कथनी और करनी में समानता होना आवश्यक है।
प्रो. अनुकूलचंद ने प्रेमचंद के साहित्य और प्रगतिशील विचारधारा के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. रामाश्रय ने प्रेमचंद के साहित्य को व्यावहारिक धरातल पर लाकर शोध कार्य किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
मानविकी संकाय के अध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्र ने कहा कि किसी भी साहित्यकार से सबसे पहले मानवीय संवेदनाओं को समझने और आत्मसात करने की सीख मिलती है। वहीं प्रो. राजमुनि ने प्रेमचंद के साहित्य पर समकालीन साहित्य के साथ तुलनात्मक शोध को समय की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. राजमुनि ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. प्रीति, डॉ. विजय कुमार रंजन सहित विभाग के शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
