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BRICS Culture Summit 2026: काशी बनेगी वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का केंद्र, आज से 10 देशों के डेलीगेट्स करेंगे विरासत संरक्षण पर मंथन

 
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विश्व की प्राचीनतम जीवित नगरी काशी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करने जा रही है। भारत की अध्यक्षता में 4 और 5 जून को वाराणसी में आयोजित होने वाली BRICS संस्कृति कार्य समूह (Culture Working Group-CWG) की दूसरी बैठक में सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

इस दो दिवसीय बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इंडोनेशिया के प्रतिनिधि शामिल होंगे। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और यूएई के प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस बैठक को और भी महत्वपूर्ण बना रही है।

संस्कृति और विरासत संरक्षण पर होगा मंथन

बैठक का मुख्य उद्देश्य BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करना, विरासत संरक्षण, संग्रहालयों, रचनात्मक उद्योगों, सांस्कृतिक पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ावा देना है।

विशेष रूप से युद्ध और संघर्ष के दौरान सांस्कृतिक धरोहरों को होने वाले नुकसान तथा उनके संरक्षण और पुनर्स्थापन जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। ईरान सहित कई देश अपने अनुभव और परियोजनाओं को इस मंच पर साझा करेंगे।

प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर वाराणसी प्रशासन ने सुरक्षा और आतिथ्य की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। एयरपोर्ट से लेकर प्रतिनिधियों के ठहरने के स्थानों तक विशेष व्यवस्था की गई है। प्रतिनिधियों के लिए काशी विश्वनाथ धाम दर्शन, गंगा आरती और शहर के प्रमुख ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण भी निर्धारित किया गया है।

मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि किसी भी विदेशी अतिथि को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, अपर पुलिस आयुक्त शिवहरि मीणा, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं।

काशी की कला और शिल्प का होगा प्रदर्शन

बैठक के दौरान काशी की समृद्ध कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इसमें बनारसी गुलाबी मीनाकारी, बनारसी ब्रोकेड साड़ी, सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क, लकड़ी के खिलौने, मेटल रिपोजे क्राफ्ट और ग्लास बीड्स जैसे जीआई टैग और ओडीओपी उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा।

स्थानीय शिल्पकारों को अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा, जिससे निर्यात और वैश्विक बाजार तक पहुंच के नए रास्ते खुल सकते हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

पद्मश्री सम्मानित और जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत के अनुसार, BRICS देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी काशी के शिल्पकारों और उद्यमियों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है। इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने के साथ-साथ कारीगरों के लिए नए व्यापारिक अवसर भी पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और काशी की पारंपरिक कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

वैश्विक सांस्कृतिक सहयोग की नई पहल

जी-20 बैठकों की सफल मेजबानी के बाद वाराणसी एक बार फिर वैश्विक स्तर की महत्वपूर्ण बैठक का केंद्र बना है। BRICS संस्कृति कार्य समूह की यह बैठक भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती देने के साथ-साथ सदस्य देशों के बीच सहयोग और संवाद के नए अवसर भी तैयार करेगी।