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BHU में जटिल सर्जरी: 35 वर्षीय मरीज के ट्यूमर से प्रभावित जबड़े को हटाकर पैर की हड्डी से बनाया नया जबड़ा
 

 
 BHU में जटिल सर्जरी: 35 वर्षीय मरीज के ट्यूमर से प्रभावित जबड़े को हटाकर पैर की हड्डी से बनाया नया जबड़ा
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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय में ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी (OMFS) इकाई ने एक जटिल शल्यक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। डॉक्टरों ने 35 वर्षीय मरीज के निचले जबड़े में मौजूद बड़े ट्यूमर को पूरी तरह निकालने के बाद उसके दाहिने पैर की फिबुला हड्डी से नया जबड़ा तैयार किया। करीब आठ घंटे चली इस सर्जरी के बाद मरीज के चेहरे की बनावट सामान्य हो गई है।

मरीज लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और एक वाहन कंपनी में वाहन धोने का काम करता है। वह चेहरे पर सूजन और निचले जबड़े में असमानता की शिकायत लेकर प्रो. अखिलेश कुमार सिंह के बाह्य रोगी विभाग में पहुंचा था। जांच में उसके निचले जबड़े में बड़ा ट्यूमर पाया गया, जिसने जबड़े की संरचना को काफी हद तक प्रभावित कर दिया था।

मरीज करीब सात वर्षों से एमेलोब्लास्टोमा नामक ट्यूमर से पीड़ित था। उसने अलग-अलग स्थानों पर इलाज कराया, लेकिन उसे स्थायी राहत नहीं मिली। इसके बाद उसे बेहतर उपचार के लिए BHU आने की सलाह दी गई।

पैर की फिबुला हड्डी से बनाया नया जबड़ा

ट्रॉमा सेंटर के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी ऑपरेशन थिएटर में हुई इस जटिल सर्जरी के दौरान ट्यूमर से प्रभावित निचले जबड़े को पूरी तरह निकाल दिया गया। इसके बाद मरीज के दाहिने पैर की फिबुला हड्डी का उपयोग करके नए जबड़े का निर्माण किया गया।

डॉक्टरों ने माइक्रोवैस्कुलर तकनीक के जरिए फिबुला की रक्त वाहिकाओं को गर्दन की रक्त वाहिकाओं से जोड़ा, जिससे नए जबड़े में रक्त संचार स्थापित किया गया। इस प्रक्रिया को माइक्रोवैस्कुलर फ्री फिबुला फ्लैप रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी कहा जाता है।

चेहरे की बनावट हुई सामान्य

सर्जरी के बाद मरीज के चेहरे की बनावट काफी हद तक सामान्य हो गई है। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज के पैर में किसी तरह की कमजोरी नहीं है और वह सामान्य रूप से चल-फिर रहा है। चेहरे की संरचना में सुधार के साथ मरीज का सामाजिक आत्मविश्वास भी लौटा है और वह मानसिक रूप से काफी खुश है।

दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. एच.सी. बरनवाल ने सफल शल्यक्रिया के लिए पूरी चिकित्सकीय टीम को शुभकामनाएं दीं। यह जटिल ऑपरेशन BHU में आधुनिक ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी की क्षमता को भी दर्शाता है।