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BHU में 15 दिन से धरने पर संविदाकर्मी, अजय राय का अल्टीमेटम- 28 अप्रैल तक समाधान नहीं तो मैं भी धरने पर बैठूंगा

बीएचयू के मधुबन परिसर में 15 दिन से संविदाकर्मियों का धरना जारी है। 1300 कर्मचारी नियमितीकरण की मांग पर अड़े हैं। कांग्रेस नेता अजय राय ने समर्थन देते हुए 28 अप्रैल तक समाधान न होने पर खुद धरने में शामिल होने की चेतावनी दी। तेज गर्मी के बीच कर्मचारियों की हालत बिगड़ रही है।

 
धरने पर संविदाकर्मी
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वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मधुबन परिसर में संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का आंदोलन अब लंबा खिंचता जा रहा है। लगातार 15वें दिन भी धरना जारी रहा, जहां 44-45 डिग्री तापमान के बीच कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। धरनास्थल पर हालात इस कदर कठिन हो गए हैं कि कई महिला कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है, बावजूद इसके आंदोलन में कोई कमी नहीं आई है।

अजय राय पहुंचे धरनास्थल, दी खुली चेतावनी

धरना स्थल पर पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कर्मचारियों को खुला समर्थन देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने साफ कहा कि यदि 28 अप्रैल तक कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे खुद भी धरने पर बैठेंगे। उनके इस बयान से आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिल गया है और दबाव बढ़ता दिख रहा है।

30-35 साल सेवा के बाद भी स्थायी नहीं, कर्मचारियों में नाराजगी

आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालय में 30 से 35 वर्षों तक सेवाएं दी हैं, लेकिन आज तक उन्हें स्थायी नहीं किया गया। उनका आरोप है कि लंबे समय से नियमितीकरण की मांग उठाई जा रही है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन देकर मामले को टाल दिया जाता है।

1300 कर्मचारी नियमितीकरण पर अड़े, पीछे हटने को तैयार नहीं

संविदाकर्मी कंचन लता राय के अनुसार, विश्वविद्यालय में करीब 1300 संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी कार्यरत हैं। इन सभी की मुख्य मांग नियमितीकरण है और अब कर्मचारी इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक ठोस निर्णय नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।

समिति बनी लेकिन फैसला अब तक अधूरा

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नियमितीकरण के लिए एक समिति का गठन किया गया है, लेकिन अब तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। कर्मचारियों का आरोप है कि हर बार समिति के नाम पर प्रक्रिया को लंबित कर दिया जाता है, जिससे उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।

नई भर्ती पर रोक की मांग, 199 पदों पर उठे सवाल

संविदाकर्मियों ने विश्वविद्यालय द्वारा निकाली गई नई भर्तियों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि तृतीय श्रेणी के कनिष्ठ लिपिक के 199 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि वर्षों से उसी पद पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को स्थायी नहीं किया जा रहा। कर्मचारियों ने मांग की है कि जब तक समिति का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक नई भर्ती पर रोक लगाई जाए।