Movie prime

मसान की होली पर फिर छिड़ा विवाद: काशी विद्वत परिषद ने जताई आपत्ति, शोक स्थलों पर आयोजन को बताया अनुचित

 
..
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now
वाराणसी। धर्म नगरी काशी अपने अनोखे पर्व-उत्सवों के लिए दुनिया भर में जानी जाती है। इन्हीं परंपराओं में एक है ‘मसान की होली’, जिसमें होली से ठीक पहले वाराणसी के महाश्मशान घाटों पर जलती चिताओं के बीच भस्म के साथ होली खेलने की परंपरा निभाई जाती है। हालांकि इस बार भी इस आयोजन को लेकर विवाद गहराता दिख रहा है।

पिछले वर्ष की तरह इस बार भी काशी विद्वत परिषद ने इस पर आपत्ति जताई है। परिषद का कहना है कि यह आयोजन सनातन परंपरा के अनुरूप नहीं है और इससे समाज में विकृति फैलने की आशंका है।

शास्त्रों में नहीं उल्लेख: परिषद

परिषद के सदस्य प्रो. विनय कुमार पांडे ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन का कहीं भी शास्त्रों में उल्लेख नहीं मिलता। उनका कहना है कि मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट शोक स्थल हैं, जहां अंतिम संस्कार और मोक्ष की कामना से जुड़े धार्मिक कर्मकांड संपन्न होते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों पर नाच-गाना या उत्सव जैसा माहौल बनाना उन परिजनों की भावनाओं को आहत कर सकता है, जो अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार के लिए वहां मौजूद होते हैं। परिषद के अनुसार, यह परंपरा के नाम पर अमर्यादित आचरण है और इससे सनातन धर्म की छवि प्रभावित होती है।

लाखों की उमड़ती है भीड़

होली से पहले इन घाटों पर ‘मसान की होली’ खेलने के लिए लाखों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। बीते कुछ वर्षों में इसमें युवाओं की भागीदारी काफी बढ़ी है। इसी बढ़ती भीड़ और आयोजन के स्वरूप को लेकर अलग-अलग धर्माचार्यों ने भी चिंता जताई है। उनका मानना है कि गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों को ऐसे आयोजनों से दूर रहना चाहिए।

फिलहाल ‘मसान की होली’ को लेकर पक्ष और विपक्ष में बहस जारी है। एक ओर इसे काशी की विशिष्ट परंपरा बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे शोक स्थलों की मर्यादा के विपरीत मानते हुए रोक लगाने की मांग की जा रही है।