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डिजिटल युग में विश्वसनीयता और सत्यता बनी पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती: प्रेम शुक्ला

 
डिजिटल युग में विश्वसनीयता और सत्यता बनी पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती: प्रेम शुक्ला
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Varanasi  : हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शनिवार को "डिजिटल युग में हिन्दी पत्रकारिता" विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान एवं पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, डिजिटल मीडिया की चुनौतियों और विश्वसनीय पत्रकारिता की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा हुई।

डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि डिजिटल माध्यमों ने पत्रकारिता को नई गति दी है। आज पत्रकारों को जानकारी प्राप्त करने के लिए पहले की तरह लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, क्योंकि सूचनाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से तेजी से उपलब्ध हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक ने पत्रकारों के कार्य को काफी सरल बनाया है और हिन्दी पत्रकारिता लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है।

पत्रकारिता में विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण: कुलपति

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी उसकी विश्वसनीयता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का क्षेत्र संभावनाओं से भरपूर है और आने वाले वर्षों में इसकी उपयोगिता और बढ़ेगी। भारत ने डिजिटल क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और इस दौर में पत्रकारों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।

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डिजिटल समाचारों की सत्यता जांचना जरूरी

उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि डिजिटल युग में सूचनाएं तेजी से लोगों तक पहुंच रही हैं, लेकिन हर सूचना पर आंख बंद करके विश्वास नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि समाचारों की सत्यता की पुष्टि करना आज पहले से अधिक आवश्यक हो गया है, क्योंकि कई बार भ्रामक खबरें भी प्रसारित होती हैं।

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खबर के पीछे की सच्चाई तलाशना ही असली पत्रकारिता

मुख्य वक्ता और वरिष्ठ पत्रकार प्रबल प्रताप सिंह ने कहा कि डिजिटल मीडिया अवसर और चुनौती दोनों लेकर आया है। उन्होंने कहा कि आज कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया के जरिए स्वयं को पत्रकार घोषित कर सकता है, लेकिन पेशेवर पत्रकारिता की पहचान भाषा की शुद्धता, जिम्मेदारी और तथ्यपरकता से होती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारों का काम केवल खबर देना नहीं, बल्कि खबर के पीछे छिपी सच्चाई को सामने लाना भी है। यही वास्तविक और जिम्मेदार पत्रकारिता की पहचान है।

तकनीकी दक्षता और अध्ययन दोनों जरूरी

तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार स्नेह रंजन ने कहा कि आधुनिक पत्रकारों के लिए डिजिटल रूप से दक्ष होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन की सलाह देते हुए कहा कि हर महीने कम से कम दो पुस्तकें पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार राहुल अवस्थी ने कहा कि टेक्स्ट, भाषा और तकनीक आज के समय की सबसे बड़ी ताकत हैं। इनका संतुलित उपयोग छात्रों के व्यक्तित्व विकास और करियर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. नागेन्द्र पाठक ने हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्षों के इतिहास और उसके विकासक्रम पर विस्तार से प्रकाश डाला।

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बड़ी संख्या में शिक्षकों और छात्रों की रही सहभागिता

कार्यक्रम में स्वागत भाषण निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने दिया, जबकि विषय प्रवर्तन डॉ. मनोहर लाल ने किया। संचालन डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वैष्णवी शुक्ला और विजय कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, डॉ. प्रमथेश पाण्डेय, डॉ. संतोष मिश्र, डॉ. जय प्रकाश श्रीवास्तव, अनिरुद्ध पाण्डेय, डॉ. शिवजी सिंह, डॉ. श्रीराम त्रिपाठी, डॉ. हरिकेश बहादुर सिंह, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. सरिता राव, डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय, खुश्बू सिंह, आकाश सिंह, डॉली विश्वकर्मा, गुरु प्रकाश सिंह, करन सिंह, शिवम तिवारी, अतुल उपाध्याय, हर्षित तिवारी, शिवांगी, हर्षिता, स्तुति, पुलकित, साजिया, अनुष्का, जुली, जाह्नवी, हर्ष, समर, वंशिका, लुकमान, पुष्कर आदि उपस्थित रहे।

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