दालमंडी मामला: हाईकोर्ट का फैसला, परिसर खाली करते ही किरायेदार के सभी कानूनी अधिकार समाप्त
वाराणसी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि जैसे ही कोई किरायेदार परिसर खाली कर देता है, उसके सभी विधिक अधिकार समाप्त हो जाते हैं और उसे अलग से बेदखली का नोटिस देना आवश्यक नहीं होता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किरायेदार के अधिकार केवल तब तक ही बने रहते हैं जब तक वह किराया देते हुए बेदखली के आदेश का सामना कर रहा हो।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वाराणसी निवासी फरमान इलाही की याचिका खारिज करते हुए दिया।
याची ने दालमंडी क्षेत्र में चल रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को चुनौती दी थी। उसका दावा था कि वह कुंडिगढ़ टोला, दालमंडी स्थित मकान में किरायेदार है। याची का कहना था कि राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण से पहले उसे धारा 21 के तहत नोटिस देना चाहिए था, क्योंकि वह संपत्ति से जुड़ा हितबद्ध पक्षकार है और उसे सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता श्रुति मालवीय ने अदालत को बताया कि याची केवल किरायेदार है और संपत्ति पर उसका कोई स्वामित्व अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि याची ने अंतरिम राहत प्राप्त करने के उद्देश्य से आंशिक रूप से ध्वस्त संपत्ति की तस्वीरें प्रस्तुत कीं, जबकि वास्तव में भवन पूरी तरह ध्वस्त किया जा चुका था। अदालत ने पाया कि तस्वीरों में तिथि और समय का उल्लेख नहीं था, इसलिए उन्हें विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि राज्य सरकार ने वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के लिए 30 जुलाई 2025 को आदेश जारी किया था। इस योजना के तहत जमीन को स्वामियों की सहमति से खरीदा जाना था। मकान के मालिक शहनवाज खान ने राज्यपाल के पक्ष में बिक्री पत्र निष्पादित कर दिया और प्रशासन को कब्जा भी सौंप दिया।
