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दालमंडी-चौक मार्ग का नाम जयशंकर प्रसाद के नाम पर रखने की मांग, नागरी प्रचारिणी सभा के व्योमेश शुक्ला ने DM को लिखा पत्र

 
Dalmandi
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वाराणसी में साहित्य और संस्कृति से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को नई पहचान दिलाने की मांग तेज हो गई है। नागरी प्रचारिणी सभा के व्योमेश शुक्ला ने दालमंडी-चौक मार्ग का नाम महान साहित्यकार जयशंकर प्रसाद के नाम पर रखने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार को पत्र भेजा है।

अपने पत्र में उन्होंने मांग की है कि दालमंडी क्षेत्र में जयशंकर प्रसाद की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाए। साथ ही उस स्थान को एक सांस्कृतिक अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके साहित्य और योगदान से परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि काशी आने वाले पर्यटक भी इस माध्यम से हिंदी साहित्य के इस महान रचनाकार को जान सकेंगे।

व्योमेश शुक्ला ने कहा कि दालमंडी-चौक मार्ग का चौड़ीकरण तेजी से किया जा रहा है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण मार्ग को जयशंकर प्रसाद के नाम से जोड़ना काशी की साहित्यिक विरासत को सम्मान देने जैसा होगा।

कामायनी की पंक्तियां उकेरने की मांग

उन्होंने अपने पत्र में यह भी सुझाव दिया कि प्रस्तावित सांस्कृतिक अनुभव केंद्र में जयशंकर प्रसाद की अमर कृति ‘कामायनी’ की प्रमुख पंक्तियां उकेरी जाएं। इसके अलावा उनकी हस्तलिपि और संक्षिप्त जीवन परिचय भी प्रदर्शित किया जाए, ताकि लोग उनके साहित्यिक योगदान को करीब से समझ सकें।

व्योमेश शुक्ला ने कहा कि जयशंकर प्रसाद केवल कवि ही नहीं, बल्कि महान उपन्यासकार, नाटककार और निबंध लेखक भी थे। ऐसे में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को सहेजना जरूरी है।

अन्य साहित्यिक स्थलों के विकास की भी मांग

अपने पत्र में उन्होंने वाराणसी और आसपास के अन्य महत्वपूर्ण साहित्यिक स्थलों के विकास की भी मांग उठाई है। इनमें लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद का आवास, चौखंभा स्थित भारतेन्दु भवन, रविंद्रपुरी स्थित आचार्य रामचंद्र शुक्ल का आवास और कबीरचौरा स्थित नीरू-नीमा टीला शामिल हैं।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इन सभी स्थलों को साहित्यिक और सांस्कृतिक अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, ताकि काशी की समृद्ध साहित्यिक विरासत को संरक्षित किया जा सके और देश-दुनिया के लोगों तक पहुंचाया जा सके।