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दालमंडी में दूसरे दिन भी जारी रहेगा ध्वस्तीकरण, 5 मस्जिदों पर चलेगा हथौड़ा; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

 
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वाराणसी: बहुप्रतीक्षित दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत बुधवार को शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे पांच मस्जिदों के चिह्नित हिस्सों को हटाया जा रहा है। गुरुवार सुबह 7 बजे से दोबारा अभियान शुरू होगा, जिसके लिए करीब 250 मजदूर लगाए गए हैं।

बुधवार को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चले अभियान के दौरान मस्जिद मिर्जा करीमुल्लाह बेग की लगभग 20-20 फीट ऊंची दोनों मीनारों को मजदूरों ने सुरक्षित तरीके से ध्वस्त कर दिया। पूरे दिन हथौड़ों और अन्य उपकरणों की मदद से चिह्नित हिस्सों को हटाने का कार्य चलता रहा।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, दालमंडी में प्रवेश रहा प्रतिबंधित

ध्वस्तीकरण के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। दालमंडी क्षेत्र में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई, बाजार बंद रखा गया और टीन शीट लगाकर रास्तों को सील कर दिया गया। मीडिया और अन्य लोगों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया।

पांच मस्जिदों ने दी थी सहमति

दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना के तहत छह धार्मिक स्थलों में से पांच मस्जिदों के प्रबंधन ने सड़क चौड़ीकरण के लिए सहमति पत्र प्रशासन को सौंपा था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने दोबारा माप कर अधिकारियों की मौजूदगी में अंतिम लाल निशान लगाए।

इनमें मस्जिद मिर्जा करीमुल्लाह बेग, संगमरमर मस्जिद, अली रजा मस्जिद, रंगीले शाह मस्जिद और निसारन की मस्जिद शामिल हैं।

50 से 60 प्रतिशत तक पूरा हुआ काम

प्रशासन के अनुसार, बुधवार को दिनभर चले अभियान में मस्जिदों के लगभग 50 से 60 प्रतिशत चिह्नित हिस्सों को हटाया जा सका। वहीं, सात मकानों पर भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। अब शेष कार्य गुरुवार को पूरा किया जाएगा।

ऐतिहासिक मस्जिदें भी परियोजना की जद में

परियोजना के तहत कई ऐतिहासिक मस्जिदों के चिह्नित हिस्से प्रभावित हो रहे हैं।

निसारन की मस्जिद का निर्माण वर्ष 1826 में हुआ था और यहां एक समय में करीब 250 लोग नमाज अदा कर सकते हैं।
रंगीले शाह मस्जिद को स्थानीय लोगों के अनुसार औरंगजेब के शासनकाल में बनाया गया था। यह लगभग 400 से 500 वर्ष पुरानी मानी जाती है और यहां करीब 500 नमाजी एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं।
अली रजा मस्जिद करीब 200 वर्ष पुरानी है। यदि पूरी सड़क चौड़ी होती है तो इसका अधिकांश हिस्सा प्रभावित होगा।
संगमरमर मस्जिद भी करीब 200 साल पुरानी बताई जाती है। इसका अग्रभाग वर्ष 1935 में दोबारा निर्मित कराया गया था।

मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि ध्वस्तीकरण से केवल इबादत की जगह ही नहीं, बल्कि आसपास की कई दुकानों और लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा।

प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए की जा रही है और सभी कार्रवाई संबंधित पक्षों की सहमति तथा तय प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है।