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DCP के सख्त निर्देशों के बावजूद हल्की धाराओं में केस! 47 जुआरियों को मिली राहत
 

 
DCP के सख्त निर्देशों के बावजूद हल्की धाराओं में केस! 47 जुआरियों को मिली राहत
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वाराणसी। शहर के पॉश रथयात्रा इलाके में सामने आए हाई-प्रोफाइल अंतरजनपदीय जुआ नेटवर्क मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। एसओजी-2 और सिगरा पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर सात जिलों से आए 47 जुआरियों को कथित तौर पर जुआ खेलते हुए गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान लाखों रुपये की नकदी, मोबाइल फोन और कई वाहन भी बरामद किए गए थे।

गुरुवार को मामले में पुलिस को उस समय झटका लगा, जब एसीजेएम-4 की अदालत ने सभी 47 आरोपियों को 20-20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दे दिया।

सख्त कार्रवाई के निर्देश, लेकिन दर्ज हुआ जुआ अधिनियम में केस

छापेमारी के बाद डीसीपी क्राइम नीतू कादयान ने मामले में कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि पारंपरिक जुआ अधिनियम में सजा सात साल से कम होने के कारण आरोपियों को आसानी से जमानत मिल जाती है। ऐसे में संगठित अपराध और संपत्ति कुर्की से संबंधित धाराओं के साथ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, आरोप है कि सिगरा पुलिस ने मुकदमा केवल सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 3/4 के तहत दर्ज किया। इसी आधार पर आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां सभी को व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश मिल गया।

तीन लोगों पर नेटवर्क चलाने का आरोप, एक अभी फरार

पुलिस की जांच में रोशन, रफीक और विजय को कथित तौर पर जुआ नेटवर्क के संचालन से जुड़ा बताया गया है। वहीं, विशाल सिंह पर किराए पर लिया गया बंद मकान जुए के अड्डे के लिए उपलब्ध कराने का आरोप है।

मौके से गिरफ्तार रोशन और रफीक को भी अन्य आरोपियों के साथ जमानत मिल गई। वहीं, तीसरे कथित मुख्य आरोपी विजय की तलाश जारी बताई जा रही है।

बताया गया कि इस जुआ अड्डे पर वाराणसी के अलावा चंदौली, भदोही, आजमगढ़, सोनभद्र, प्रयागराज और मिर्जापुर समेत पूर्वांचल के कई जिलों से लोग पहुंचते थे। अब मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई और जांच पर नजर बनी हुई है।