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सावन से पहले काशी में फिर गूंजेगी ‘ॐ’ की दिव्य ध्वनि, चौराहों पर Sound System से भक्तिमय माहौल की तैयारी

 
सावन से पहले काशी में फिर गूंजेगी ‘ॐ’ की दिव्य ध्वनि, चौराहों पर Sound System से भक्तिमय माहौल की तैयारी
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Varanasi : शिव की नगरी काशी में सावन से पहले एक बार फिर ‘ॐ’ की दिव्य ध्वनि गूंजने की तैयारी शुरू हो गई है। पहले यह पवित्र ध्वनि शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे Sound System से प्रसारित होती थी, लेकिन पिछले कुछ समय से यह व्यवस्था बंद हो गई थी। अब इसे दोबारा शुरू करने की कवायद तेज कर दी गई है।

वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) द्वारा 18 प्रमुख गलियों की पहचान की गई है, जहां यह ध्वनि सावन में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बनाएगी। इन गलियों में रोज बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पर्यटक आते हैं। VDA ने इन सभी स्थानों का सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया है। इसके साथ ही, प्रमुख घाटों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। जल्द ही यहां भी Sound System लगाकर 'ॐ' की ध्वनि प्रसारित की जाएगी।

सावन से पहले काशी में फिर गूंजेगी ‘ॐ’ की दिव्य ध्वनि, चौराहों पर Sound System से भक्तिमय माहौल की तैयारी

इसके अलावा, काशी के जिन मंदिरों में रात के समय रोशनी की कमी रहती है, वहां ‘फसाड लाइटिंग’ की व्यवस्था की जा रही है। इन मंदिरों की सूची तैयार की जा रही है और योजना यह है कि सावन के पवित्र महीने में ये सभी मंदिर रात में भी भव्य और आकर्षक दिखें। यह पहल न सिर्फ श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि शहर की आध्यात्मिक छवि को और मजबूत करेगी।

सावन से पहले काशी में फिर गूंजेगी ‘ॐ’ की दिव्य ध्वनि, चौराहों पर Sound System से भक्तिमय माहौल की तैयारी

पर्यटन विभाग भी इस अभियान(Sound System) में सहयोग कर रहा है। चूंकि सावन में काशी आने वाले पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, ऐसे में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जा रही हैं। Sound System और फसाड लाइटिंग के अलावा गलियों की साफ-सफाई, प्रमुख मंदिरों तक रास्तों का सौंदर्यीकरण और सूचना पट्टों की स्थापना जैसे कई कार्य भी प्रस्तावित हैं।

सावन से पहले काशी में फिर गूंजेगी ‘ॐ’ की दिव्य ध्वनि, चौराहों पर Sound System से भक्तिमय माहौल की तैयारी

इस पूरी योजना का उद्देश्य है कि सावन में काशी आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहां की आध्यात्मिकता को न सिर्फ महसूस करें, बल्कि उसे संपूर्ण रूप से जी सकें।