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बाबा विश्वनाथ के दरबार में धीरेंद्र शास्त्री, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का खुला समर्थन

 
बाबा विश्वनाथ के दरबार में धीरेंद्र शास्त्री, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का खुला समर्थन
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Varanasi : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपनी मां के साथ आज काशी पहुंचे। बाबा भोले की नगरी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के बाद उन्होंने संपूर्ण विश्व पर व्याप्त युद्ध के संकट के बीच शांति की राह सनातन से निकलने की बात कही। धीरेंद्र शास्त्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का खुलकर समर्थन किया। साथ ही उन्होंने यूजीसी कानून को लेकर फिर से विचार करने की जरूरत बताई।

ट्रंप पर तीखा हमला 

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व पर युद्ध का संकट छाया हुआ है। उन्होंने कहा कि आज अविनाशी की धरती काशी आए हैं। मां गंगा और बाबा विश्वनाथ को दंडवत करने का सौभाग्य मिलेगा। इस समय पूरे विश्व में युद्ध का रास्ता निकल रहा है। हम यही कहेंगे कि भारत ही एक ऐसी जगह है, जहां से सनातन की गूंज से शांति का रास्ता निकलेगा।

विपक्ष के भारत को अमेरिका के ब्लैकमेल करने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भरोसेमंद नहीं हैं। वह शाम को कुछ और बोलते हैं और सुबह कुछ और। ऐसे इंसान पर कभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता। जिस तरह उन्होंने अपने अधिकार का गलत उपयोग करके टैरिफ वॉर शुरू किया, उससे उनकी कार्य प्रणाली दिखती है कि वह दुनिया में अशांति फैलाना चाहते हैं। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और अशांति का खत्मा सनातन के रास्ते पर ही चलकर हो सकता है।

शंकराचार्य का समर्थन

धीरेंद्र शास्त्री ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गोरक्षा अभियान को लेकर कहा कि हम सभी संतों के प्रत्येक अभियान से जुड़े हैं। जो भी संत सनातन, गौ माता, गीता, गाय, गंगा, गोविंद और गोपाल का कार्य कर रहे हैं, हम उनके दास हैं। हम उनके साथ मिलकर काम करते रहेंगे।

यूजीसी कानून पर विचार की जरूरत  

यूजीसी कानून को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इस देश में हम जोड़ना चाहते हैं, तोड़ना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि हमने यह बात अपने मंच से भी कही है। हमारी हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि यूजीसी के लिए फिर से विचार किया जाए। देश में खाई और दीवार न बनाई जाए। बाबा बागेश्वर ने कहा कि एकता के सूत्र में सबको पिरोया जाए, ताकि भारत भव्य हो, दिव्य हो नव्य हो। भारत विश्वगुरु बने।

एकांतवास पर साधना

धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि वे 1 महीने के लिए सार्वजनिक संपर्क से दूर रहेंगे। मई में वे बद्रीनाथ के बर्फीले पहाड़ों पर साधना करेंगे। इस दौरान वे किसी भी नेटवर्क में नहीं रहेंगे, न धाम पर उपस्थित रहेंगे और न ही कथा या दिव्य दरबार का आयोजन करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस मोड़ पर मैं खड़ा हूं, वहां खुद को साधना बहुत आवश्यक है। बहकाने वाले नित्य नए रास्ते आते हैं, ऐसे में खुद का तप और आत्म-साधना जरूरी है।