वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ एससी भारद्वाज का निधन, नेत्रदान से दो लोगों की जिंदगी में आएगी रोशनी
वाराणसी: शहर के वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. सुधीर चंद भारद्वाज (डॉ. एससी भारद्वाज) का 13 अगस्त को निधन हो गया। वह 78 वर्ष के थे। उनका जन्म 1 जनवरी 1948 को हुआ था। उनके निधन की खबर से चिकित्सा जगत के साथ सामाजिक क्षेत्र और उनके लंबे समय से इलाज करा रहे मरीजों एवं शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई।
अंतिम विदाई से पहले परिवार ने एक ऐसा फैसला लिया, जो डॉ. भारद्वाज की सेवा भावना को आगे बढ़ाता है। उनके पुत्र डॉ. समीर भारद्वाज की सहमति से उनका नेत्रदान कराया गया। लायंस आई बैंक के नेत्रबैंक मित्र डॉ. अरुण कुमार गुप्ता ने नेत्रदान की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सहयोग किया। अंतिम संस्कार के दौरान डॉ. समीर भारद्वाज ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।
कबीरचौरा अस्पताल में दी लंबे समय तक सेवाएं
डॉ. एससी भारद्वाज ने लंबे समय तक कबीरचौरा अस्पताल में दंत चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दीं। सरल स्वभाव, विनम्र व्यवहार और मरीजों के प्रति आत्मीयता के कारण वह मरीजों और सहकर्मियों के बीच काफी सम्मानित थे।
उन्होंने चिकित्सा को महज पेशे तक सीमित नहीं रखा। उनके लिए मरीजों की सेवा समाजसेवा का एक माध्यम थी। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के उपचार में भी वह विशेष रुचि लेते थे और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे।
निधन के बाद भी जारी रही सेवा की भावना
लायंस आई बैंक के सचिव डॉ. अनुराग टंडन ने बताया कि परिवार की सहमति के बाद डॉ. भारद्वाज का नेत्रदान कराया गया। लायंस आई बैंक के निदेशक डॉ. अभिषेक चंद्रा ने कहा कि डॉ. भारद्वाज का नेत्रदान समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश है। उन्होंने बताया कि किसी दिवंगत व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों के जीवन में रोशनी पहुंचाई जा सकती है।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग
डॉ. भारद्वाज के निधन की सूचना मिलने के बाद उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के अलावा उनके पुराने मरीज और शुभचिंतक भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।
पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीबी सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉ. भारद्वाज ने चिकित्सा सेवा को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा। उनका व्यक्तित्व और मरीजों के प्रति समर्पण लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा।
मरीजों के बीच हमेशा याद किए जाएंगे
डॉ. एससी भारद्वाज की सहज उपलब्धता और मरीजों के साथ आत्मीय व्यवहार को उनके चाहने वाले आज भी याद कर रहे हैं। लंबे समय तक चिकित्सा सेवा से जुड़े रहने के कारण वाराणसी में उनकी अलग पहचान थी। उनके निधन से चिकित्सा जगत ने एक समर्पित दंत चिकित्सक और समाज ने एक संवेदनशील एवं सेवाभावी व्यक्तित्व खो दिया। हालांकि, निधन के बाद कराया गया उनका नेत्रदान उनकी सेवा भावना को आगे बढ़ाने वाली एक मिसाल बन गया है।
