UP की जेलें होंगी हाईटेक: वाराणसी समेत 14 जेलों में ड्रोन से होगी निगरानी
उत्तर प्रदेश की 14 जेलों में अब ड्रोन कैमरों से सुरक्षा निगरानी होगी। वाराणसी केंद्रीय कारागार समेत कई जेलों को हाईटेक किया जा रहा है। साथ ही 22 जिलों में बंदी रक्षकों को बॉडी-वॉर्न कैमरे दिए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रही है। प्रदेश की 14 जेलों में निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि 22 जिलों में तैनात जेल कर्मियों को बॉडी-वॉर्न कैमरे दिए जाएंगे। इसका उद्देश्य जेलों में सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।
अब तक जेलों की निगरानी ऊंचे वॉच टावरों से बंदी रक्षकों द्वारा की जाती थी, लेकिन कैदियों की बढ़ती संख्या और स्टाफ की कमी के चलते यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रही थी। ऐसे में ड्रोन कैमरे जेल परिसरों की निगरानी को आसान और ज्यादा प्रभावी बनाएंगे।
वाराणसी का केंद्रीय कारागार लगभग 141 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें करीब 29 एकड़ भूमि पर खेती भी की जाती है। इतने बड़े परिसर और प्रत्येक बैरक की निगरानी ड्रोन के माध्यम से अब बेहतर तरीके से की जा सकेगी। महानिदेशक कारागार पीसी मीणा द्वारा प्रदेश की 14 जेलों के लिए 14 ड्रोन कैमरे उपलब्ध कराए गए हैं।
इसके साथ ही 22 जिलों के लिए 110 बॉडी-वॉर्न कैमरे (कंधे पर लगाए जाने वाले कैमरे) और 58 जेलों के लिए सोलर लाइट की भी व्यवस्था की गई है। बॉडी-वॉर्न कैमरों से ड्यूटी के दौरान बंदी रक्षकों की सभी गतिविधियां स्वतः रिकॉर्ड होती रहेंगी, जो किसी भी विवाद, हिंसा या जांच के दौरान साक्ष्य के रूप में काम आएंगी।
गौरतलब है कि पूर्व में जेलों में कैदियों की मौत या हिंसा की घटनाओं के बाद प्रशासन पर सवाल उठते रहे हैं। वर्ष 2025 में एंटी करप्शन टीम द्वारा पकड़े गए एक डॉक्टर की जिला अस्पताल में मौत के मामले में जेल प्रशासन को सीसीटीवी फुटेज जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी थी। ऐसे में बॉडी-वॉर्न कैमरे प्रशासन के लिए सुरक्षा कवच साबित होंगे।
ड्रोन कैमरों से मिलने वाली लाइव तस्वीरों को जेल के सीसीटीवी कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा। ड्रोन से न केवल सुरक्षा निगरानी होगी, बल्कि जेल में संचालित खेती, उद्योगों और गोशालाओं की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। साथ ही कैदियों की देखरेख में लगे बंदी रक्षकों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी निगरानी संभव हो सकेगी।
ड्रोन और कैमरे उपलब्ध कराने वाली कंपनी जेल कर्मचारियों को इसके संचालन की ट्रेनिंग भी देगी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक राधाकृष्ण मिश्र ने बताया कि सीमित स्टाफ के बावजूद ड्रोन तकनीक से जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।
इन जेलों को दिया जाएगा ड्रोन और बॉडी वॉर्न कैमरे
ड्रोन कैमरे वाराणसी, फतेहगढ़ और इटावा केंद्रीय कारागार के अलावा अलीगढ़, आगरा, कानपुर नगर, गोरखपुर, जौनपुर, अयोध्या, सुल्तानपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, प्रयागराज और मथुरा की जिला जेलों में लगाए जाएंगे। वहीं आगरा, बरेली, इटावा और वाराणसी केंद्रीय कारागार समेत मेरठ, बुलंदशहर, प्रयागराज, फिरोजाबाद, फतेहगढ़, सहारनपुर, बाराबंकी, देवरिया, सुल्तानपुर, शाहजहांपुर, खीरी, झांसी, अयोध्या, बस्ती, प्रतापगढ़ और मथुरा की जिला जेलों को पांच-पांच बॉडी-वॉर्न कैमरे दिए जाएंगे।
