अमिताभ ठाकुर की पेशी के दौरान पुलिस पर अभद्र आचरण का आरोप, आज़ाद अधिकार सेना ने दिया DM को ज्ञापन
वाराणसी: न्यायालय परिसर में पुलिस द्वारा कथित दुर्व्यवहार और न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के विरोध में आज़ाद अधिकार सेना ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में एक साथ सभाएं कर मुख्य न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय को संबोधित सामूहिक ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रेषित किया।

यह ज्ञापन 19 दिसंबर 2025 को वाराणसी स्थित विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में हुई उस घटना से जुड़ा है, जब संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पेशी के दौरान पुलिस द्वारा अभद्र आचरण किए जाने का आरोप लगाया गया है।
न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पेशी के समय काशी जोन के डीसीपी गौरव बंसवाल के नेतृत्व में मौजूद पुलिस अधिकारियों ने न्यायालय कक्ष के भीतर अनुचित भाषा का प्रयोग किया। आरोप है कि श्री ठाकुर को अपनी वैधानिक बात रखने से रोका गया और बलपूर्वक न्यायालय कक्ष से बाहर ले जाया गया। संगठन का दावा है कि न्यायालय परिसर से बाहर ले जाते समय मीडिया की रिकॉर्डिंग रोकने के उद्देश्य से सीटी बजाने जैसी गतिविधियां की गईं, जिससे पारदर्शिता और स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।
क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्रवाई की मांग
आज़ाद अधिकार सेना ने इसे Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 2(c) के अंतर्गत Criminal Contempt of Court की श्रेणी में बताया है। संगठन का कहना है कि इस घटना से न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न हुई और अधीनस्थ न्यायालय की गरिमा को गंभीर आघात पहुंचा।
हाईकोर्ट से की गई प्रमुख मांगें
संगठन ने उच्च न्यायालय से मांग की है कि, मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लिया जाए। संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्यवाही शुरू की जाए। भविष्य में न्यायालय परिसरों में पुलिस आचरण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
