रोडवेज बस स्टैंड प्राइवेटाइजेशन के खिलाफ भड़के कर्मचारी, मांगों को लेकर 26 मई को करेंगे मुख्यालय का घेराव
यूपी रोडवेज कर्मचारियों ने निजी बस संचालन, PPP मॉडल, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और महंगाई भत्ते समेत 22 मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। 18 मई को क्षेत्रीय कार्यालयों पर धरना और 26 मई को परिवहन निगम मुख्यालय पर विशाल प्रदर्शन किया जाएगा।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच टकराव तेज हो गया है। रोडवेज कर्मचारी संगठनों ने सरकार और निगम प्रबंधन पर कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा कर दी है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी लंबित मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीयकृत मार्गों पर अवैध निजी बस संचालन लगातार बढ़ रहा है, जबकि परिवहन निगम के बस स्टेशनों को PPP मॉडल के नाम पर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही वर्षों से कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
26 मई को मुख्यालय घेराव
कर्मचारी संगठन के अनुसार, पहले चरण में 6 मई से 16 मई तक प्रदेश के सभी डिपो में गेट मीटिंग और आम सभाओं के जरिए कर्मचारियों को जागरूक किया गया। दूसरे चरण में 18 मई को सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों के कार्यालयों के सामने धरना-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री और परिवहन निगम प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
संगठन ने साफ किया है कि यदि इसके बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 26 मई 2026 को परिवहन निगम मुख्यालय में विशाल धरना और प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। उसी दौरान अगली रणनीति और बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी।
PPP मॉडल और निजी बस संचालन का हो रहा विरोध
कर्मचारियों की सबसे बड़ी आपत्ति “मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026” को लेकर है। संगठन का आरोप है कि इस योजना के जरिए रोडवेज बस स्टेशनों से निजी बसों का संचालन बढ़ाया जा रहा है, जिससे परिवहन निगम की आय और कर्मचारियों का भविष्य दोनों प्रभावित होंगे।
कर्मचारी नेताओं ने मांग की है कि PPP मॉडल के तहत बस स्टेशनों को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए और रोडवेज के राष्ट्रीयकृत मार्गों पर अवैध संचालन के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की मांग
संगठन ने कहा कि हजारों संविदा चालक, परिचालक और तकनीकी कर्मचारी वर्षों से रोडवेज में काम कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें नियमित नहीं किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि लगातार काम लेने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रहीं।
संगठन ने संविदा कर्मचारियों की सेवा नियमावली बनाने, पारिश्रमिक बढ़ाने और उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान देने की भी मांग की है। साथ ही 50 प्रतिशत से कम लोड फैक्टर पर वेतन कटौती की व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी उठाई गई है।
महंगाई भत्ता, सातवें वेतन आयोग और ग्रेच्युटी पर भी नाराजगी
रोडवेज कर्मचारी संगठन ने कहा कि निगम लगातार लाभ में होने के बावजूद कर्मचारियों के लंबित देयों का भुगतान नहीं किया जा रहा। कर्मचारियों को समय से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा और सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान भी अब तक लंबित है।
संगठन ने राज्य कर्मचारियों की तर्ज पर 25 लाख रुपये तक ग्रेच्युटी लाभ लागू करने की मांग की है। इसके अलावा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा और फ्री पास देने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है।
महिला यात्रियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए किराया छूट की मांग
कर्मचारी संगठन ने राजस्थान मॉडल का हवाला देते हुए यूपी रोडवेज बसों में महिला यात्रियों और वरिष्ठ नागरिकों को 50 प्रतिशत किराया छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे यात्रियों की संख्या बढ़ेगी और अंतरराज्यीय बस संचालन में समानता आएगी।
कर्मचारियों ने दी चेतावनी
संगठन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि आंदोलन के दौरान कर्मचारियों या पदाधिकारियों का उत्पीड़न किया गया तो आंदोलन तत्काल प्रभाव से तेज कर दिया जाएगा। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि रोडवेज को बचाने और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए अब निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
