काशी में पहली बार स्टेट लेवल पोल वॉल्ट चैंपियनशिप, 2000 खिलाड़ी दिखाएंगे दम
वाराणसी: काशी में पहली बार प्राचीन यूनानी खेल पोल वॉल्ट की स्टेट लेवल ओपन चैंपियनशिप का आयोजन होने जा रहा है। इससे पहले शहर में केवल जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं ही आयोजित की गई थीं। अब यह बड़ा आयोजन 4 और 5 मई को लालपुर स्टेडियम में होगा, जिसमें सीनियर बालक-बालिकाओं समेत करीब 2000 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।
इस चैंपियनशिप में पोल वॉल्ट के साथ-साथ एथलेटिक्स के कई अन्य खेल भी आयोजित किए जाएंगे। सेंथेटिक (रबर) ट्रैक पर फाइबर ग्लास पोल की मदद से खिलाड़ी अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। प्रतियोगिता में लड़कियां लगभग 3 मीटर और लड़के 4.10 मीटर तक ऊंची छलांग लगाने का प्रयास करेंगे। इस खेल में तेज दौड़ के बाद पोल के सहारे टेक-ऑफ करना सबसे अहम और ताकत वाला हिस्सा माना जाता है।
पोल वॉल्ट कोच विनय सिंह ने बताया कि हिंदी में इस खेल को “बांस कूद” कहा जाता है। यह खेल 1896 में ओलंपिक में शामिल किया गया था। वर्तमान में पुरुषों का ओलंपिक रिकॉर्ड 6.22 मीटर और महिलाओं का 5.25 मीटर है। उन्होंने कहा कि बनारस में भी धीरे-धीरे खिलाड़ियों, खासकर लड़कियों को इस खेल के लिए तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यह खेल काफी महंगा और जोखिम भरा है। एक पोल की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये होती है और खिलाड़ियों के वजन के अनुसार पोल का चयन किया जाता है। उदाहरण के तौर पर 40 किलो वजन की खिलाड़ी के लिए लगभग 55 किलोग्राम (110 एलबीएस) का पोल उपयुक्त होता है, जबकि लड़कों के लिए यह वजन अधिक होता है।
कोच ने यह भी चेतावनी दी कि पोल वॉल्ट में अकेले अभ्यास करना खतरनाक हो सकता है। टेक-ऑफ के दौरान पोल हाथ से छूटने या संतुलन बिगड़ने पर खिलाड़ी गंभीर रूप से घायल हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस खेल में निवेश की कमी है और फिलहाल निजी प्रयासों से ही खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि मैदान सरकार द्वारा उपलब्ध कराया गया है।
इस प्रतियोगिता में वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, गाजियाबाद, बरेली, गाजीपुर, चंदौली, भदोही, जौनपुर, मऊ, आजमगढ़, गोरखपुर, बस्ती और अयोध्या समेत कई जिलों के खिलाड़ी ट्रायल के जरिए चयनित होकर भाग लेंगे। केवल वाराणसी से ही 500 से अधिक खिलाड़ियों के शामिल होने की उम्मीद है।
पोल वॉल्ट के अलावा ऊंची कूद, लंबी कूद, 100 मीटर, 200 मीटर, 800 मीटर, 1500 मीटर दौड़, रिले रेस और जेवेलिन थ्रो जैसी प्रतियोगिताएं भी होंगी। सभी एथलेटिक्स स्पर्धाओं में 100 से अधिक खिलाड़ियों को मेडल प्रदान किए जाएंगे।
