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पूर्व PM एच.डी. देवेगौड़ा की पत्नी चेनम्मा का काशी में पिंडदान, छोटे बेटे ने निभाई रस्म

 
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वाराणसी। पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा की पत्नी चेनम्मा देवेगौड़ा के निधन के बाद बुधवार को वाराणसी में उनके छोटे बेटे एच. डी. रमेश गौड़ा ने गंगा घाट पर विधि-विधान से पिंडदान किया। चेनम्मा देवेगौड़ा का 18 जुलाई को बेंगलुरु में निधन हुआ था। उनके निधन के बाद परिवार की ओर से उनकी आत्मा की शांति के लिए काशी में धार्मिक अनुष्ठान कराया गया।

गंगा घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच एच. डी. रमेश गौड़ा ने पिंडदान की रस्म पूरी की। धार्मिक परंपराओं के अनुसार उन्होंने अपनी दिवंगत मां की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के साथ पिंडदान समेत अन्य आवश्यक कर्मकांड संपन्न किए।

छोटे बेटे ने निभाई मां के प्रति धार्मिक जिम्मेदारी

चेनम्मा देवेगौड़ा के पिंडदान के लिए उनके छोटे बेटे एच. डी. रमेश गौड़ा विशेष रूप से वाराणसी पहुंचे। उन्होंने स्वयं गंगा घाट पर धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया और पूरे विधि-विधान के साथ पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की।

देवेगौड़ा परिवार में बड़े बेटे एच. डी. कुमारस्वामी भी देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं।

एच. एन. शर्मा भी रहे मौजूद

पिंडदान के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर के पूर्व राजनीतिक सचिव और बलिया निवासी एच. एन. शर्मा भी मौजूद रहे। उन्होंने धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

एच. एन. शर्मा ने चेनम्मा देवेगौड़ा को याद करते हुए उन्हें बेहद महान और स्नेहमयी महिला बताया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी उनके व्यक्तित्व से प्रभावित थे और अपनी डायरी में चेनम्मा देवेगौड़ा के बारे में उल्लेख करते थे।

पिंडदान के बाद बाबा विश्वनाथ के किए दर्शन

गंगा घाट पर पिंडदान और अन्य धार्मिक रस्में पूरी करने के बाद एच. डी. रमेश गौड़ा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ का विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया।

इस दौरान उन्होंने दिवंगत चेनम्मा देवेगौड़ा की आत्मा की शांति और परिवार के सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। काशी में धार्मिक अनुष्ठान और बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ परिवार की ओर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए धार्मिक कर्तव्य पूरा किया गया।

18 जुलाई को हुआ था चेनम्मा देवेगौड़ा का निधन

चेनम्मा देवेगौड़ा का 18 जुलाई को बेंगलुरु में निधन हुआ था। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद परिवार, समर्थकों और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई थी।

अब वाराणसी में गंगा तट पर पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठान के जरिए परिवार ने उनकी आत्मा की शांति के लिए धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया। काशी में हुए इस अनुष्ठान के दौरान परिवार की श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव भी देखने को मिला।