जंगल से काशी तक: पंडी गांव की महिलाओं ने पहली बार देखा शहर, काशी विश्वनाथ में किया दिव्य दर्शन
वाराणसी/चंदौली। चंदौली के नौगढ़ विकासखंड का पंडी गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से काफी दूर है। लगभग 80 घरों वाले इस गांव के लोग अब तक शहर की चकाचौंध और आधुनिक जीवन से अनजान रहे हैं। लेकिन अब इस गांव की दशकों पुरानी इच्छा आखिरकार पूरी हो गई।
सोमवार को पंडी गांव की 40 महिलाएं और 10 पुरुष पुलिस की विशेष बस से वाराणसी पहुंचे। यहां उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर सहित संकटमोचन और दुर्गाकुंड मंदिर में दर्शन-पूजन किया। यह पूरी पहल पुलिस विभाग के मिशन शक्ति अभियान के तहत की गई।
कुछ दिन पहले डीआईजी वाराणसी जोन वैभव कृष्ण जब पंडी गांव के दौरे पर पहुंचे थे, तब उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से बातचीत की थी। बातचीत के दौरान महिलाओं ने बताया कि उन्होंने आज तक कभी शहर नहीं देखा। उनकी इस बात ने अधिकारियों को भी भावुक कर दिया।
जब डीआईजी ने महिलाओं से उनकी इच्छा पूछी तो उन्होंने काशी विश्वनाथ, संकटमोचन और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन की बात कही। इसके बाद डीआईजी ने तुरंत निर्देश जारी करते हुए इस यात्रा की व्यवस्था कराई।
चंदौली के पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने बताया कि सोमवार सुबह 9 बजे पुलिस की विशेष बस गांव पहुंची और 50 ग्रामीणों को सुरक्षित रूप से वाराणसी लाया गया। यात्रा के दौरान दो इंस्पेक्टर और चार उपनिरीक्षक भी सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद रहे।
डीआईजी ने कहा कि यह पहल समाज के दूरस्थ और वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है। वहीं एसपी ने बताया कि सभी श्रद्धालुओं को प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराया गया और पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा व सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया।
इधर, पंडी गांव की यह यात्रा ग्रामीणों के लिए जीवनभर याद रहने वाला अनुभव बन गई है। गांव की महिलाएं और पुरुष पहली बार काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भव्यता से रूबरू हुए।
वहीं दूसरी ओर, पंडी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। गर्मियों में जलस्रोत सूख जाने से पेयजल संकट गंभीर हो जाता है और कई परिवारों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
