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शौचालय से कचरा प्रबंधन तक... स्वच्छता के हर पैमाने पर नंबर-1 वाराणसी, स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 में टॉप

स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025 में वाराणसी को सेंट्रल जोन का सबसे स्वच्छ जिला घोषित किया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट में शौचालय उपयोग, कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई के आधार पर काशी ने शानदार प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश को भी राज्यों की श्रेणी में पहला स्थान मिला है।

 
स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025
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वाराणसी: धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी अब स्वच्छता के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रही है। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जारी स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025 की रिपोर्ट में वाराणसी को सेंट्रल जोन का नंबर-1 जिला घोषित किया गया है। वहीं राज्यों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश ने पहला स्थान हासिल कर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है।

गुरुवार देर रात जारी हुई इस रैंकिंग के बाद जिला प्रशासन और ग्रामीण क्षेत्रों में खुशी का माहौल है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) प्रखर कुमार सिंह ने इस उपलब्धि का श्रेय ग्रामीण जनता को देते हुए उनके सहयोग और जागरूकता की सराहना की।

गांवों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए हुआ था सर्वे

सीडीओ प्रखर कुमार सिंह ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने यह सर्वेक्षण कराया था। इसका उद्देश्य गांवों में स्वच्छता की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था।

सर्वे में शौचालयों की उपलब्धता, उनका नियमित उपयोग, ठोस और तरल कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई, सामुदायिक शौचालयों की स्थिति और ग्रामीणों की संतुष्टि जैसे कई बिंदुओं को शामिल किया गया।

95 प्रतिशत परिवार नियमित कर रहे शौचालय का उपयोग

रिपोर्ट के मुताबिक वाराणसी जिले के ग्रामीण इलाकों में 93 प्रतिशत परिवारों के पास शौचालय उपलब्ध हैं। इनमें से 95 प्रतिशत परिवार नियमित रूप से शौचालय का उपयोग कर रहे हैं।साफ-सफाई को लेकर जागरूकता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि शौचालय उपयोग के बाद 98 प्रतिशत लोग हाथ धोते पाए गए। इनमें से 88 प्रतिशत लोग हाथ धोने के लिए साबुन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

कचरा प्रबंधन को लेकर भी बढ़ी जागरूकता

ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन को लेकर भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। सर्वे के अनुसार 58 प्रतिशत परिवार जैविक और अजैविक कचरे को अलग रखने की समझ रखते हैं।

इसके अलावा 47 प्रतिशत परिवार गैर-जैविक कचरे को कबाड़ी को बेचते हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 39 प्रतिशत गांवों में कम्युनिटी सैनिटरी कॉम्प्लेक्स मौजूद हैं, जिनमें से 98 प्रतिशत पूरी तरह चालू हालत में पाए गए।

देशभर के 744 जिलों में हुआ था सर्वे

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा यह सर्वे देश के 744 जिलों के 20,659 गांवों में कराया गया था। इसके तहत 3,22,033 ग्रामीण परिवारों और 1,03,607 सार्वजनिक स्थलों, धार्मिक स्थानों, स्कूलों, पंचायत भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक शौचालय परिसरों का निरीक्षण किया गया। इन्हीं मानकों के आधार पर स्वच्छता रैंकिंग जारी की गई, जिसमें वाराणसी ने सेंट्रल जोन में पहला स्थान हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाया।