गंगा-वरुणा एलिवेटेड परियोजना: वाराणसी के इन 53 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक
वाराणसी। जनपद में प्रस्तावित गंगा एलिवेटेड और वरुणा एलिवेटेड परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज हो गई है। जिलाधिकारी वाराणसी ने दोनों परियोजनाओं के दायरे में आने वाली भूमि के क्रय-विक्रय, सट्टा इकरारनामा, दान-पत्र, भूमि की प्रकृति परिवर्तन तथा सरकारी भूमि के आवंटन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक ने पत्र भेजकर बताया था कि वरुणा नदी के किनारे राष्ट्रीय राजमार्ग-31 और वाराणसी रिंग रोड के बीच प्रस्तावित वरुणा लिंक/कनेक्टर कॉरिडोर तथा गंगा नदी के किनारे राष्ट्रीय राजमार्ग-19 से रिंग रोड तक गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना है।
बताया गया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम-1956 के तहत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई की जा रही है। अधिनियम की धारा 3(ए) के तहत गजट प्रकाशन 27 फरवरी 2026 और 8 अप्रैल 2026 को किया जा चुका है तथा आगे की प्रक्रिया जारी है।
गंगा एलिवेटेड परियोजना से पिंडरा तहसील के 11 गांव प्रभावित होंगे, जिनमें रमना, डोमरी, सीरगोवर्धनपुर, छित्तूपुर, भगवानपुर, सूजाबाद, नरिया, कोदोपुर, रामनगर और वाजिदपुर शामिल हैं।
वहीं वरुणा एलिवेटेड परियोजना के तहत सदर और पिंडरा तहसील के 41 गांव प्रभावित होंगे। इनमें हुकुलगंज, शहरखास, पहाड़पुर, सिकरौल, खजुरी, चौका, जैतपुरा, भदऊ, कज्जाकपुर, महादेवपुर, सरायकाजी, धनेसरी, दासेपुर, कोइराजपुर, शहाबुद्दीनपुर, चमांव, अनंगपुर, भगतुपुर, प्रतापट्टी और मंशापुर समेत अन्य गांव शामिल हैं।
डीएम ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), उपजिलाधिकारी सदर एवं पिंडरा, सहायक महानिरीक्षक निबंधन तथा संबंधित तहसीलदारों को निर्देश दिया है कि प्रभावित गाटा संख्या के अनुसार आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।
परियोजना क्षेत्र में आने वाली निजी भूमि के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण और सरकारी भूमि के आवंटन पर अब अग्रिम आदेश तक प्रतिबंध प्रभावी रहेगा।
