विदेशी मेहमानों को लेकर दूसरी बार काशी पहुंचा गंगा विलास क्रूज, काशी की संस्कृति और आध्यात्मिकता से हुए रूबरू
वाराणसी। देश में निर्मित दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज गंगा विलास विदेशी पर्यटकों को लेकर दूसरी बार काशी पहुंचा। यहां पांच दिनों तक रुकने के बाद रविवार शाम पांच बजे क्रूज कोलकाता के लिए रवाना हो गया। इस दौरान क्रूज में सवार 15 विदेशी पर्यटकों ने काशी के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया और यहां की संस्कृति को करीब से जाना।
काशी प्रवास के दौरान पर्यटकों ने चुनार के ऐतिहासिक किले का दीदार किया। इसके साथ ही श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए और गंगा आरती में शामिल होकर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किया। पर्यटकों ने बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल सारनाथ का भी भ्रमण किया। शनिवार को सभी पर्यटक नमो घाट पहुंचे और वहां की सुविधाओं व खूबसूरती को देखा।
बक्सर, चौसा और जगदीशपुर भी जाएंगे पर्यटक
काशी से रवाना होने के बाद गंगा विलास क्रूज पर सवार पर्यटक अपनी यात्रा के दौरान बिहार के ऐतिहासिक स्थलों को भी देखेंगे। इस क्रम में वे बक्सर और चौसा के युद्धस्थलों का भ्रमण करेंगे। इसके अलावा आरा जिले में स्थित जगदीशपुर के ऐतिहासिक किले को भी देखने जाएंगे।
पर्यटक पटना में दो दिन रुकेंगे। इस दौरान वे शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण करेंगे। यात्रा पूरी होने के बाद क्रूज के 22 जुलाई को कोलकाता पहुंचने का कार्यक्रम बताया गया है। वहां से पर्यटक हवाई मार्ग के जरिए अपने-अपने देशों के लिए रवाना होंगे।
चार देशों के नागरिक और भारतीय एनआरआई शामिल
गंगा विलास क्रूज में सवार 15 पर्यटकों में स्विट्जरलैंड के तीन, जर्मनी के दो, यूनाइटेड किंगडम के तीन और फ्रांस के दो नागरिक शामिल हैं। इनके अलावा पांच भारतीय मूल के अनिवासी भारतीय (एनआरआई) भी इस यात्रा का हिस्सा हैं।
पहले भी बना चुका है विश्व रिकॉर्ड
गंगा विलास क्रूज इससे पहले भी अपनी लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्रा को लेकर चर्चा में रहा है। अपनी पिछली यात्रा के दौरान इसने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम के जलमार्गों से होते हुए बांग्लादेश के रास्ते डिब्रूगढ़ तक करीब 3,200 किलोमीटर की यात्रा की थी। इस यात्रा ने इसे नदियों के रास्ते दुनिया की सबसे लंबी दूरी तय करने वाले क्रूज के रूप में पहचान दिलाई।
गंगा विलास के जरिए विदेशी पर्यटकों को भारत की धार्मिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विविधता को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है। काशी जैसे आध्यात्मिक शहरों से लेकर बिहार के ऐतिहासिक स्थलों तक की यह यात्रा देश में नदी पर्यटन की संभावनाओं को भी सामने लाती है।
