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हर पात्र परिवार की महिला को SHG से जोड़ने का लक्ष्य, वाराणसी में 20 अगस्त तक चलेगा विशेष अभियान

 
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वाराणसी। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए वाराणसी में परिवार संतृप्तिकरण विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य ऐसे सभी पात्र परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़ना है, जो अभी तक समूह की गतिविधियों का हिस्सा नहीं बन सकी हैं।

यह विशेष अभियान 5 अगस्त से 20 अगस्त 2026 तक चलेगा। इसके तहत गांवों में घर-घर सर्वे के साथ ग्राम चौपालें आयोजित की जा रही हैं। इन चौपालों में पात्र परिवारों की पहचान करने के साथ ही महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के फायदे और उपलब्ध आजीविका के अवसरों की जानकारी दी जा रही है।

किन परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता?

अभियान में मुख्यमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, हर घर नल योजना से जुड़े पात्र परिवारों के साथ पात्र गृहस्थी राशन कार्ड धारक और मनरेगा जॉब कार्डधारी परिवारों की महिला सदस्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा अन्य पात्र परिवारों की महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा रहा है।

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के निर्देश पर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में अभियान को गति दी गई है। इसे सफल बनाने के लिए ग्राम विकास, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद, कृषि और समाज कल्याण विभाग समेत कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी सहयोग कर रहे हैं।

वाराणसी में 1.68 लाख से ज्यादा महिलाएं SHG से जुड़ीं

वाराणसी में स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क लगातार मजबूत हो रहा है। जिले में वर्तमान में 32 संकुल स्तरीय संघ, 870 ग्राम संगठन और 13 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। इन समूहों से 1.68 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं।

उपायुक्त स्वतः रोजगार पवन कुमार सिंह के मुताबिक, अभियान का मकसद सिर्फ महिलाओं को समूहों में शामिल करना नहीं है। उन्हें नियमित बचत, बैंकिंग, ऋण सुविधा और आजीविका के अलग-अलग साधनों से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाना भी इसका अहम उद्देश्य है।

बैंक सखी से लेकर ड्रोन सखी तक बनीं महिलाएं

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाएं अब सिर्फ बचत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। कई महिलाएं बैंक सखी, बीसी सखी, आजीविका सखी और ड्रोन सखी जैसी भूमिकाएं निभा रही हैं।

इसके अलावा महिलाएं कृषि आधारित काम, पावरलूम संचालन, लकड़ी के खिलौने और सॉफ्ट टॉय निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, फूड कार्ट, काशी प्रेरणा मार्ट और राशन की दुकानों के संचालन जैसी गतिविधियों से भी जुड़ रही हैं।

SHG ने बदली ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर

स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के लिए बचत और ऋण का माध्यम होने के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक बदलाव का जरिया भी बन रहे हैं। समूहों के माध्यम से महिलाओं को बैंकिंग, वित्तीय साक्षरता, सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और उनके अधिकारों को लेकर जागरूक किया जा रहा है।

समूहों से मिलने वाली वित्तीय मदद का इस्तेमाल महिलाएं छोटे कारोबार और स्वरोजगार शुरू करने में कर रही हैं। इससे उनकी अपनी आमदनी बढ़ने के साथ परिवार में निर्णय लेने की भूमिका और सामाजिक भागीदारी भी मजबूत हो रही है।

5 हजार से ज्यादा परिवारों को अब तक जोड़ा गया

अभियान के तहत अब तक करीब 5 हजार से अधिक पात्र परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य है कि अभियान के दौरान गांव-गांव जाकर पात्र परिवारों की पहचान की जाए और कोई भी पात्र महिला SHG से जुड़ने के अवसर से वंचित न रहे।

अधिकारियों के मुताबिक, स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को लगातार आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और 'लखपति महिला' बनने की दिशा में आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।