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काशी में गंगा दशहरा की भव्य तैयारी, 5000 चुनरियों से होगा मां गंगा का श्रृंगार, होगी भव्य महाआरती

25 मई 2026 को गंगा दशहरा पर पांच दुर्लभ शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व रहेगा। काशी के दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर भव्य गंगा आरती, 56 भोग और 5000 चुनरियों से मां गंगा का विशेष श्रृंगार किया जाएगा।

 
गंगा दशहरा
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वाराणसी: इस वर्ष 25 मई को मनाया जाने वाला गंगा दशहरा कई मायनों में बेहद खास रहने वाला है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन पांच दुर्लभ और शुभ योगों का निर्माण होगा, जिससे गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाएगा। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और मां गंगा की पूजा करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। काशी में गंगा दशहरा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। दशाश्वमेध घाट से लेकर अस्सी घाट तक विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

गंगा दशहरा पर बनेंगे 5 शुभ योग

इस बार गंगा दशहरा पर सर्वार्थसिद्धि, आयुष्मान, शोभन, सौभाग्य और अमृत योग का निर्माण हो रहा है। इनमें से सर्वार्थसिद्धि, आयुष्मान और शोभन योग की शुरुआत सुबह 5 बजकर 23 मिनट से होगी, जो पूर्वाह्न 11 बजकर 32 मिनट तक प्रभावी रहेंगे।

इसके बाद सौभाग्य योग दोपहर 12 बजकर 43 मिनट से शुरू होगा, जबकि अमृत योग दोपहर 12 बजकर 51 मिनट से प्रारंभ होकर शाम तक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ये सभी योग स्नान, पूजा, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

गंगा स्नान से दूर होते हैं दोष और संकट

पंडित विकास पाण्डेय के अनुसार गंगा दशहरा के दिन मां गंगा दस प्रकार के पापों का शमन करती हैं। ब्रह्मपुराण में वर्णित है कि तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक पापों से मुक्ति इस दिन गंगा स्नान से मिलती है।

उन्होंने बताया कि मां गंगा के पवित्र जल में ग्रह दोष, पितृ दोष और मानसिक कष्टों को शांत करने की अद्भुत शक्ति है। गंगा स्नान करने से भय, रोग, संकट और जीवन की नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है।

स्नान के दौरान करें इन मंत्रों का जाप

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा स्नान के समय मंत्रों का जाप विशेष पुण्यदायी माना जाता है। पंडित विकास पाण्डेय ने बताया कि स्नान के दौरान इस मूल मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होगा-

ॐ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः

वहीं पाप मुक्ति के लिए इस श्लोक का उच्चारण करने की भी सलाह दी गई है

“गंगा गंगेति यो ब्रूयाद् योजनानां शतैरपि,
मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति।”

मान्यता है कि श्रद्धा से ‘गंगा-गंगा’ नाम लेने मात्र से भी व्यक्ति पापों से मुक्त होकर पुण्य का भागी बनता है।

दशाश्वमेध घाट पर होगी भव्य गंगा आरती

गंगा दशहरा के अवसर पर काशी में सुबह ब्रह्म मुहूर्त से धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे। सूर्योदय के साथ मां गंगा का विशेष जलाभिषेक किया जाएगा। शाम को दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि की ओर से भव्य महाआरती का आयोजन होगा। इस दौरान 11 वैदिक ब्राह्मण अर्चक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां गंगा की आरती करेंगे, जबकि 21 रिद्धि-सिद्धियां चंवर सेवा में शामिल होंगी। महाआरती शाम 6:30 बजे से शुरू होगी।

अस्सी घाट पर 56 भोग और 5000 चुनरियों से होगा श्रृंगार

अस्सी घाट पर भी गंगा दशहरा को लेकर विशेष आयोजन किए जाएंगे। यहां मां गंगा को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे। इसके साथ ही आसपास के जिलों से लाई गई करीब 5000 चुनरियों से मां गंगा का भव्य श्रृंगार किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और धार्मिक आयोजन भी होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।