हरिश्चंद्र घाट का बदला डिजाइन, अब और भव्य बनेगा… 17 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक घाट
वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट का पुनर्विकास नई डिजाइन के साथ जारी है, लेकिन सात चिमनियों की स्थापना में देरी से काम अटका है। जुलाई की जगह अब दिसंबर तक परियोजना पूरी होने का लक्ष्य है। 17 करोड़ रुपये की इस योजना को जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन के सीएसआर फंड से विकसित किया जा रहा है।
वाराणसी: काशी के ऐतिहासिक हरिश्चंद्र घाट के पुनर्विकास कार्य में एक बार फिर डिजाइन में बदलाव किया गया है। नए स्वरूप में घाट के फ्रंट पर नक्काशी के साथ कई गुंबद आकार लेंगे, जिससे यह पहले से अधिक भव्य नजर आएगा। हालांकि जमीन पर काम की रफ्तार अब भी सुस्त बताई जा रही है।
चिमनियों के बिना नहीं पड़ सकती छत
घाट पर कार्यरत एजेंसी से जुड़े लोगों के अनुसार पाइलिंग का काम पूरा हो चुका है, लेकिन छत डालने से पहले चिमनियों की स्थापना जरूरी है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए Energy Gas Equipments Private Limited के माध्यम से सात चिमनियां लगाई जानी हैं।
सूत्रों का कहना है कि एजेंसी को अभी तक ऑर्डर और भुगतान जारी नहीं हुआ है। भुगतान के बाद ही सामग्री उपलब्ध होगी और इसमें लगभग तीन महीने का समय लग सकता है। यही कारण है कि कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही।
डेडलाइन फिर बढ़ी, अब दिसंबर का लक्ष्य
पहले दावा किया जा रहा था कि घाट का पुनर्विकास जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन अब दिसंबर तक कार्य पूर्ण करने की बात कही जा रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी कई बार डेडलाइन जारी हुई, लेकिन ट्रांसफॉर्मर हटाने, बारिश और मंदिरों की शिफ्टिंग जैसी बाधाओं के चलते काम प्रभावित हुआ। फिलहाल इन अड़चनों का समाधान हो चुका है।
CM के निर्देश के बाद बढ़ेगी रफ्तार?
हाल ही में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने वाराणसी दौरे के दौरान विकास कार्यों की समीक्षा में घाट के पुनर्विकास को लेकर नाराजगी जताई और मैनपावर बढ़ाकर गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने के निर्देश दिए।
इस घाट का शिलान्यास 7 जुलाई 2003 को प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा किया गया था। लंबे समय से चल रही इस परियोजना को लेकर अब प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय दिख रही है।
17 करोड़ की लागत से होगा आधुनिक घाट
हरिश्चंद्र घाट का पुनर्विकास जेएसडब्लू फाउंडेशन के सीएसआर फंड से किया जा रहा है। कार्यदायी संस्था BIPL Brijtech Engineering Private Limited है, जबकि डिजाइनर एडिकाइस (मुंबई) और नगर निगम नोडल एजेंसी की भूमिका में हैं।
करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से 13,250 वर्ग फीट क्षेत्र में घाट का पुनर्निर्माण किया जा रहा है।
घाट पर मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
पुनर्विकास के बाद घाट पर 13 शवदाह गृह (क्रेमेटोरियम) बनाए जाएंगे। यहां बिजली और लकड़ी दोनों माध्यम से अंतिम संस्कार की व्यवस्था होगी। प्रदूषण नियंत्रण के लिए 100 फीट ऊंची चिमनी स्थापित की जाएगी, जिससे जलते शव सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देंगे।
साथ ही पंजीकरण कक्ष, सामुदायिक वेटिंग एरिया, शौचालय, स्टोर रूम, कोर्टयार्ड, सर्विस एरिया और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था भी की जाएगी। बाढ़ को ध्यान में रखते हुए निर्माण सड़क स्तर से 1.8 मीटर ऊंचा रखा गया है, ताकि शव स्थल तक पानी न पहुंचे।
