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वाराणसी में बढ़ा हीटवेव का खतरा, दोपहर 11 से 3 बजे तक बाहर निकलने  से बचे, DM ने जारी की एडवाइजरी

वाराणसी में भीषण गर्मी और हीटवेव को देखते हुए जिलाधिकारी ने एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने लोगों को लू, हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से बचने के उपाय बताए हैं। बच्चों, बुजुर्गों, श्रमिकों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

 
वाराणसी में बढ़ा हीटवेव का खतरा
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वाराणसी: लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने सभी संबंधित विभागों को हीटवेव और लू से बचाव के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने लोगों से दोपहर के समय घरों से बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की अपील की है।

प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि तेज धूप और गर्म हवाओं से बचने के लिए घर की खिड़कियों को एल्युमिनियम पन्नी, गत्ते या मोटे पर्दों से ढककर रखें ताकि बाहरी गर्मी अंदर न आ सके। मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखने और बच्चों व पालतू जानवरों को बंद वाहनों में अकेला न छोड़ने की भी सलाह दी गई है।

लू से बचाव के लिए खानपान और पहनावे पर जोर

जिलाधिकारी ने लोगों से हल्का और संतुलित भोजन करने की अपील की है। बासी भोजन और मादक पदार्थों के सेवन से बचने को कहा गया है। गर्मी के दौरान शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए लस्सी, छाछ, बेल का शरबत, नमक-चीनी का घोल, नींबू पानी और आम का पना जैसे पेय पदार्थों के सेवन की सलाह दी गई है।

साथ ही लोगों को हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनने, सिर को टोपी या कपड़े से ढकने और अनावश्यक रूप से दोपहर 11 बजे से शाम 3 बजे के बीच बाहर न निकलने को कहा गया है।

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

प्रशासन के अनुसार 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मजदूर, किसान, खिलाड़ी और खुले में काम करने वाले लोगों को हीटवेव से सबसे अधिक खतरा है।

इसके अलावा मोटापे, हृदय रोग, मधुमेह, पार्किंसंस और त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मानसिक रोगों की दवाइयां या डॉययूरेटिक दवाएं लेने वाले लोग भी लू की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।

लू लगने के प्रमुख लक्षण

प्रशासन ने हीट इग्जॉशन और हीट स्ट्रोक के लक्षणों को लेकर भी चेतावनी जारी की है। शरीर का तापमान बढ़ना, तेज सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, पेशाब कम आना, तेज धड़कन और त्वचा का लाल व गर्म हो जाना लू के मुख्य संकेत बताए गए हैं।

गंभीर स्थिति में मरीज को भ्रम की स्थिति, सांस लेने में दिक्कत और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। प्रशासन ने कहा कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

क्या करें और क्या न करें?

प्रशासन ने लोगों से रेडियो, टीवी और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखने को कहा है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और ओआरएस का सेवन करने की सलाह दी गई है।

नियोक्ताओं को निर्देश दिया गया है कि मजदूरों के लिए कार्यस्थल पर ठंडा पानी उपलब्ध कराएं और भारी काम सुबह या शाम के समय करवाएं। गर्भवती श्रमिकों और कमजोर कर्मचारियों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है।

बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं के लिए विशेष सलाह

एडवाइजरी में बच्चों और बुजुर्गों को लेकर भी खास सावधानी बरतने की बात कही गई है। बच्चों में डिहाइड्रेशन के संकेत पहचानने और उन्हें लगातार पानी पिलाने की सलाह दी गई है। वहीं बुजुर्गों की दिन में कम से कम दो बार निगरानी करने और उन्हें ठंडे वातावरण में रखने को कहा गया है।

पशुपालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि जानवरों को धूप से बचाकर छायादार स्थानों में रखें और पर्याप्त मात्रा में साफ पानी उपलब्ध कराएं।

लू लगने पर क्या करें?

अगर किसी व्यक्ति को लू लग जाए तो उसे तुरंत छायादार और ठंडे स्थान पर ले जाएं। कपड़े ढीले करें, शरीर पर ठंडे पानी की पट्टी रखें और ओआरएस या नमक-चीनी का घोल पिलाएं।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गंभीर स्थिति होने पर मरीज को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि हीट स्ट्रोक जानलेवा साबित हो सकता है।