दालमंडी चौड़ीकरण केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अंतिम आदेश तक नहीं होगी कोई तोड़फोड़
वाराणसी: दालमंडी क्षेत्र में प्रस्तावित मकान ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मामले में अंतिम निर्णय होने तक संबंधित भवनों पर किसी भी प्रकार की बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा है कि यदि भविष्य में कोई अंतिम आदेश पारित किया जाता है तो वह दो सप्ताह तक प्रभावी नहीं माना जाएगा, ताकि प्रभावित पक्ष कानूनी विकल्प अपना सके।
दालमंडी के मकानों पर प्रस्तावित थी ध्वस्तीकरण कार्रवाई
वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र स्थित मकानों से जुड़ा है। याचिकाकर्ता अलीमुन निशा और जुल करनैन ने प्रशासन द्वारा प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें पर्याप्त अवसर दिए बिना और सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना भवन गिराने की तैयारी की जा रही है। उनका तर्क था कि ऐसी कार्रवाई उनके संपत्ति संबंधी अधिकारों को प्रभावित करेगी।
हाईकोर्ट में क्या हुई सुनवाई?
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि अभी तक मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया है और अंतिम आदेश से पहले ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले में अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार की बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अंतिम आदेश के बाद भी मिलेगा दो सप्ताह का समय
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई अंतिम आदेश पारित किया जाता है तो वह तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा। अदालत ने निर्देश दिया कि अंतिम आदेश के बाद दो सप्ताह तक उसे प्रभावी नहीं माना जाएगा। इस अवधि के दौरान संबंधित पक्ष कानून के तहत उपलब्ध अन्य कानूनी उपायों का सहारा ले सकेंगे।
