बनारस के हिंदी माध्यम स्कूलों में गूँजेगी तमिल, 2 दिसंबर से शुरू होगा खास अभियान
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से भाषाई और सांस्कृतिक एकता की अनूठी मिसाल पेश की जा रही है। हिंदी भाषी इलाके के स्कूली बच्चे अब तमिल भाषा सीखेंगे। काशी तमिल संगमम (KTS) 2025 के चौथे संस्करण की थीम ‘तमिल सीखें-तमिल करकलम’ रखी गई है, जिसके तहत 2 दिसंबर से तमिलनाडु के 50 शिक्षक और विद्वान बनारस के सरकारी व निजी स्कूलों में बच्चों को तमिल भाषा, उसकी संस्कृति, खान-पान और काशी-तमिल की दो प्राचीन परंपराओं से रूबरू करवाएंगे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के छात्रों में सांस्कृतिक जुड़ाव पैदा करना, सभी भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान जगाना और तमिल में आम बोलचाल सिखाना है। यह आयोजन भारत की दो सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं – काशी और तमिल – को फिर से जोड़ने वाला ऐतिहासिक सांस्कृतिक सेतु बन चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ विजन को साकार करते हुए इस संगमम में दोनों क्षेत्रों के बीच सभ्यतागत, सांस्कृतिक, भाषाई और जन-जन के रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। शिक्षण के आदान-प्रदान, सांस्कृतिक विसर्जन, शैक्षणिक संवाद और युवा भागीदारी को बढ़ावा देने की योजना है।
आयोजन में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, आईआईटी मद्रास और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। केंद्रीय संस्कृति, सूचना एवं प्रसारण, पर्यटन, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, MSME, कौशल विकास मंत्रालयों के साथ-साथ भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) और उत्तर प्रदेश सरकार सहयोग कर रही है।
तमिलनाडु से 1400 से अधिक प्रतिनिधि आएंगे
सात श्रेणियों में विभाजित 1400 से ज्यादा सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल तमिलनाडु से वाराणसी पहुंच रहा है। इसमें छात्र-शिक्षक, लेखक, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के विशेषज्ञ, पेशेवर कारीगर, महिलाएं और आध्यात्मिक विद्वान शामिल हैं।
प्रयागराज और अयोध्या की यात्रा भी
आठ दिवसीय इस अनुभवात्मक दौरे में तमिलनाडु का दल वाराणसी के बाद प्रयागराज और अयोध्या भी जाएगा। अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन करेंगे। वाराणसी में महाकवि सुब्रमण्यम भारती का पैतृक निवास, केदार घाट, लघु तमिलनाडु क्षेत्र का काशी मदम, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और माता अन्नपूर्णा मंदिर के दर्शन-भ्रमण का कार्यक्रम है। मेहमान बनारसी व्यंजन, हस्तशिल्प और स्थानीय विरासत से भी परिचित होंगे।
