प्रशिक्षु महिला आरक्षियों को हाईटेक सुरक्षा और आपात प्रतिक्रिया का पाठ, पुलिस आयुक्त ने दिया विशेष प्रशिक्षण
वाराणसी। आरटीसी/पुलिस लाइन में बुधवार को प्रशिक्षु महिला आरक्षियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने शहर के प्रमुख एवं संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग और आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई से जुड़ी अहम जानकारियां विस्तार से साझा कीं। साथ ही उन्होंने महिला आरक्षियों को अपने दायित्वों का पाठ भी पढ़ाया।
पुलिस आयुक्त ने एयरपोर्ट, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, रेलवे स्टेशन, ताज होटल, रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन प्रतिष्ठानों पर तैनात पुलिसकर्मियों की सतर्कता, अनुशासन और सजगता ही किसी भी संभावित खतरे को टालने में निर्णायक भूमिका निभाती है। महिला प्रशिक्षुओं को ड्यूटी के दौरान सतर्क दृष्टि, शालीन व्यवहार और त्वरित प्रतिक्रिया की महत्ता समझाई गई।
आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के प्रयोग पर चर्चा करते हुए पुलिस आयुक्त ने HHMD (हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर) और DFMD (डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर) के सही उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रवेश द्वारों पर प्रभावी जांच व्यवस्था के लिए इन उपकरणों का दक्षतापूर्वक प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (BDDS) की कार्यप्रणाली बताते हुए संदिग्ध वस्तुओं की पहचान, सुरक्षित घेराबंदी और विस्फोटक खतरे की स्थिति में त्वरित रिस्पांस के तरीकों पर प्रकाश डाला।
पुलिस कमिश्नर ने PIDS (पेरिमीटर इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम) की उपयोगिता बताते हुए कहा कि यह प्रणाली किसी भी प्रतिष्ठान की बाहरी सीमा पर होने वाली घुसपैठ की पहचान कर सुरक्षा घेरा मजबूत करती है। वहीं टायर किलर सिस्टम के माध्यम से संदिग्ध वाहनों को तत्काल रोकने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई। इसके अलावा एंटी-ड्रोन सुरक्षा प्रणाली पर चर्चा करते हुए ड्रोन गतिविधियों की पहचान, निगरानी और नियंत्रण के तरीकों से भी अवगत कराया गया।
डॉग स्क्वाड की भूमिका को रेखांकित करते हुए पुलिस आयुक्त ने कहा कि विस्फोटक पदार्थों की खोज और संदिग्ध वस्तुओं की पहचान में डॉग स्क्वाड बेहद प्रभावी होता है, खासकर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में। आपात परिस्थितियों में फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की त्वरित उपलब्धता को भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया गया, ताकि किसी भी घटना में जनहानि को न्यूनतम किया जा सके।
सीसीटीवी निगरानी के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने ड्रोन कैमरे, बुलेट कैमरे, नाइट विजन और थर्मल कैमरों की उपयोगिता स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि ये आधुनिक कैमरे दिन-रात संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने में कारगर साबित होते हैं। अंत में महिला आरक्षियों को अनुशासन, समय पालन और जिम्मेदार आचरण बनाए रखने का संदेश दिया गया।
