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वाराणसी में बन रही देश की सबसे ऊंची सरस्वती प्रतिमा, बंगाल के करीगर कर रहे निर्माण

 
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वाराणसी। दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा में भव्य और विशाल प्रतिमाओं का चलन अब बंगाल के साथ-साथ काशी में भी तेजी से बढ़ रहा है। बीते तीन वर्षों से वाराणसी में बड़ी प्रतिमाओं की मांग लगातार बढ़ी है। पिछले साल जहां देश की दूसरी सबसे ऊंची 45 फीट की मां सरस्वती की प्रतिमा काशी में बनी थी, वहीं इस बार इससे भी बड़ी 53 फीट ऊंची प्रतिमा तैयार की जा रही है। इसके साथ ही 46 फीट ऊंची एक और प्रतिमा भी बनाई जा रही है, जो देश की तीसरी सबसे बड़ी सरस्वती प्रतिमा मानी जाएगी।

दोनों विशाल प्रतिमाएं खोजवां स्थित मूर्ति कारखाने में तैयार हो रही हैं, जहां काशी और बंगाल के करीब 14 कुशल कारीगर दिन-रात काम में जुटे हैं।

प्रख्यात मूर्तिकार अभिजीत विश्वास के अनुसार, पूजा पंडालों में अब बड़ी और आकर्षक मूर्तियों की मांग तेजी से बढ़ी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 30 से 53 फीट ऊंचाई वाली कुल 27 बड़ी प्रतिमाएं बन रही हैं, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुनी हैं। सभी प्रतिमाएं बैठी मुद्रा में होंगी।

महारानी के रूप में होंगी मां सरस्वती

53 फीट ऊंची प्रतिमा के साथ दो विशाल शेर भी होंगे। मां के शृंगार से लेकर वस्त्र तक बंगाल से लाई गई कृत्रिम चांदी से तैयार किए जाएंगे। यह प्रतिमा मां दुर्गा और लक्ष्मी के मिश्रित स्वरूप में, भारत की महारानी के लुक में दिखाई देगी। इसे चेतगंज दलहट्टा स्थित आर्यावर्त स्पोर्टिंग क्लब के पंडाल में स्थापित किया जाएगा, जहां पिछले साल भी देश की दूसरी सबसे बड़ी प्रतिमा लगाई गई थी।

वहीं दूसरी 46 फीट ऊंची प्रतिमा कृत्रिम सोने के शृंगार में सजी होगी, जिसमें मां सरस्वती विशाल हंस पर विराजमान रहेंगी। यह प्रतिमा सोनिया गुजराती गली स्थित न्यू एकता क्लब में स्थापित की जाएगी।

प्रतिमाओं की खासियत

53 फीट की प्रतिमा में आठ से नौ फीट ऊंचा मुकुट, 15 फीट चौड़ाई, आठ-आठ फीट ऊंचे दो शेर और सात फीट लंबी वीणा होगी। जबकि 46 फीट की प्रतिमा 12 फीट के हंस पर विराजमान होगी, जिसमें मां के चार हाथ अलग-अलग मुद्राओं में दर्शाए जाएंगे।

इन कारखानों में इस समय सौ से अधिक प्रतिमाएं बन रही हैं, जिन्हें पूरे पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में भेजा जाएगा।