काशी में 16 जुलाई से गूंजेगा ‘जय जगन्नाथ’, 54 घंटे तक रथ पर विराजेंगे प्रभु; 15 जुलाई को निकलेगी भव्य यात्रा
वाराणसी। धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की नगरी काशी में इस वर्ष लक्खा मेलों की शुरुआत भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा से होगी। ओडिशा के पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा की तर्ज पर आयोजित होने वाला यह प्राचीन और भव्य आयोजन 16 से 18 जुलाई तक संपन्न होगा। इससे पूर्व 15 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा नगर भ्रमण पर निकलकर भक्तों को दर्शन देंगे। तीन दिवसीय मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर महास्नान एवं जलाभिषेक अनुष्ठान के साथ होगा। अस्सी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में प्रातःकाल से भगवान का विशेष जलाभिषेक किया जाएगा। श्रद्धालु दिनभर भगवान को जल अर्पित कर सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करेंगे। इस आयोजन में श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट और शापुरी परिवार की विशेष भूमिका रहेगी।
श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के सचिव शैलेष त्रिपाठी ने बताया कि सनातन परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर विशेष जलाभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं। इसी मान्यता के तहत 30 जून से 14 जुलाई तक भगवान अनवसर काल में रहेंगे। इस अवधि में श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होंगे और भगवान विश्राम करेंगे।
अनवसर काल के दौरान भगवान को प्रतिदिन औषधीय जड़ी-बूटियों एवं परवल से तैयार विशेष काढ़ा अर्पित किया जाएगा। यही काढ़ा प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित किया जाएगा। 14 जुलाई को भगवान को परवल का विशेष जूस अर्पित किया जाएगा, जिसके बाद उनका विशेष श्रृंगार, पूजन और आरती होगी। इसी दिन भक्तों को नवयौवन दर्शन का दुर्लभ अवसर प्राप्त होगा, जिसे अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।
15 जुलाई को भगवान की भव्य डोली यात्रा निकाली जाएगी। दोपहर बाद विशेष श्रृंगार के उपरांत शाम चार बजे अस्सी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से यात्रा प्रारंभ होगी। यह यात्रा खोजवां सहित विभिन्न मार्गों से होती हुई रथयात्रा चौराहे तक पहुंचेगी। मार्ग में श्रद्धालु पुष्पवर्षा, भजन-कीर्तन और जयघोष के साथ भगवान का स्वागत करेंगे।
16 जुलाई की भोर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजन और श्रृंगार के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा रथ पर विराजमान होंगे। सुबह 5:15 बजे से तीनों विग्रह भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद लगातार तीन दिनों तक भगवान रथारूढ़ होकर लगभग 54 घंटे तक श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। प्रतिदिन केवल भोग, आरती और श्रृंगार के समय लगभग एक घंटे के लिए दर्शन स्थगित रहेंगे, जबकि रात 12 बजे शयन आरती के बाद कपाट बंद किए जाएंगे।
रथयात्रा महोत्सव का समापन 19 जुलाई को बहुड़ा यात्रा के साथ होगा। इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ रथयात्रा मेला स्थल से पुनः अस्सी स्थित मंदिर लौटेंगे। 20 जुलाई से मंदिर में नियमित दर्शन-पूजन की व्यवस्था पूर्ववत शुरू हो जाएगी।
सदियों पुरानी काशी की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत और आस्था का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष आयोजित होने वाला यह लक्खा मेला देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा काशी की धार्मिक परंपराओं, लोकआस्था और सांस्कृतिक वैभव का अद्भुत संगम मानी जाती है।
