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महाकुंभ की तैयारियों का शंखनाद: काशी में 12 जुलाई को जुटेंगे 1000 से अधिक महामंडलेश्वर और संत

हरिद्वार अर्धकुंभ और नासिक सिंहस्थ कुंभ 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। काशी के 13 अखाड़ों ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। 12 जुलाई को वाराणसी में जूना अखाड़े की अहम बैठक होगी, जिसमें देश-विदेश के एक हजार से अधिक संत और पदाधिकारी शामिल होंगे।

 
महाकुंभ की तैयारियों का शंखनाद
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वाराणसी: हरिद्वार में अगले वर्ष आयोजित होने वाले अर्धकुंभ और नासिक के सिंहस्थ कुंभ को लेकर धर्मनगरी काशी में तैयारियों का शंखनाद हो चुका है। काशी के सभी 13 अखाड़ों ने कुंभ की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। टेंट निर्माण, साधु-संतों के प्रवास, कोठारियों की रवानगी और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अखाड़ों में लगातार मंथन चल रहा है। आगामी 12 जुलाई को वाराणसी में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में कुंभ आयोजन से जुड़ी जिम्मेदारियां विभिन्न पदाधिकारियों को सौंपी जाएंगी।

12 जुलाई को काशी में होगी अखाड़ों की अहम बैठक

जूना अखाड़े के प्रधान कार्यालय काशी में होने वाली इस बैठक में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज समेत देशभर की 500 से अधिक शाखाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले 1000 से अधिक महामंडलेश्वर, श्रीमहंत और पदाधिकारी शामिल होंगे। नेपाल से भी प्रतिनिधिमंडल बैठक में भाग लेगा, जबकि कुछ संत ऑनलाइन माध्यम से जुड़ेंगे। शुक्रवार से ही देश के विभिन्न राज्यों से संतों और अखाड़ा पदाधिकारियों का वाराणसी पहुंचना शुरू हो गया है।

टेंट, आवास और व्यवस्थाओं पर बनेगी रणनीति

जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन भारती ने बताया कि बैजनत्था स्थित अखाड़ा शाखा में होने वाली बैठक में हरिद्वार और नासिक कुंभ के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी। इसमें कुंभ स्थल पर टेंट लगाने, कोठारियों की रवानगी, संतों के आवास, पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा होगी।

उन्होंने बताया कि हरिद्वार में भूमि आवंटन की प्रक्रिया जारी है और नवंबर तक टेंट सहित सभी प्रमुख व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी। इसके बाद अखाड़ों के संतों का पहला जत्था हरिद्वार पहुंचना शुरू हो जाएगा।

दो माह पहले हरिद्वार पहुंचेंगे साधु-संत

अखाड़ों के अनुसार कुंभ के प्रमुख स्नानों से करीब दो महीने पहले ही साधु-संतों के जत्थे हरिद्वार पहुंच जाएंगे। इस दौरान वे वहां प्रवास करेंगे, तप-साधना करेंगे और निर्धारित तिथियों पर शाही स्नान सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे।

इन प्रमुख संतों की रहेगी मौजूदगी

बैठक में अखाड़ा परिषद के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज, हरि गिरि, प्रेम गिरि, उमाशंकर भारती, महेशपुरी, शिवानंद, आनंदपुरी, शिवगिरि सहित करीब 20 महामंडलेश्वर, श्रीमहंत और जूना अखाड़े की 52 सदस्यीय प्रबंधन समिति भी शामिल होगी।

काशी के अन्य अखाड़ों ने भी तेज की तैयारी

काशी स्थित निरंजनी, आह्वान, अटल, निर्वाणी, अग्नि, आनंद सहित वैष्णव अखाड़ों ने भी कुंभ को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सभी अखाड़े अलग-अलग बैठकें कर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं और कुंभ स्थलों पर सुविधाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

नासिक में बारिश बनी सबसे बड़ी चुनौती

मोहन भारती ने बताया कि नासिक सिंहस्थ कुंभ सावन-भाद्रपद के दौरान आयोजित होता है, जब वहां भारी बारिश होती है। ऐसे में बारिश से बचाव के लिए पहले से मजबूत टेंट, जल निकासी और अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी पड़ती हैं। कई अखाड़ों के नासिक में स्थायी भवन भी मौजूद हैं, जिससे व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने में मदद मिलेगी।