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काशी विद्यापीठ की विरासत को नई पहचान, 'विद्या का आनन्द विद्यापीठ' का प्रथम प्रदर्शन

 
काशी विद्यापीठ की विरासत को नई पहचान, 'विद्या का आनन्द विद्यापीठ' का प्रथम प्रदर्शन
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Varanasi : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में रविवार को आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक एवं पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह द्वारा सम्पादित 'शैक्षणिक प्रवास' पत्रिका का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उनके निर्देशन में निर्मित विश्वविद्यालय की डॉक्यूमेंट्री 'विद्या का आनन्द विद्यापीठ' का प्रथम प्रदर्शन भी किया गया।

पत्रिका के उप-सम्पादक डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय तथा सह-सम्पादक डॉ. मुंकेश कुमार शुक्ल हैं। वहीं, डॉक्यूमेंट्री की पटकथा डॉ. नागेन्द्र पाठक, डॉ. शिवजी सिंह एवं डॉ. अजय वर्मा ने तैयार की है। डॉक्यूमेंट्री में वॉयस ओवर अनिरुद्ध पाण्डेय ने दिया है, जबकि पुलकित जायसवाल एवं समर प्रताप सिंह ने सहयोग प्रदान किया।

डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय स्थित समिति कक्ष में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने पत्रिका एवं डॉक्यूमेंट्री से जुड़े सभी सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि 'शैक्षणिक प्रवास' केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की जिज्ञासा, अनुभवों और सीख का जीवंत दस्तावेज है। वहीं 'विद्या का आनन्द विद्यापीठ' डॉक्यूमेंट्री विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत, राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है।

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उन्होंने कहा कि वर्ष 1921 में राष्ट्रीय आंदोलन की प्रेरणा से स्थापित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रसेवा की परंपरा का प्रतीक है। यह डॉक्यूमेंट्री विश्वविद्यालय के गौरवपूर्ण इतिहास, संघर्ष और संकल्प को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास है।

पत्रिका के सम्पादक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि 'शैक्षणिक प्रवास' में महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, पर्यटन अध्ययन संस्थान, मनोविज्ञान विभाग तथा समाज कार्य विभाग के विद्यार्थियों के शैक्षणिक भ्रमण, अध्ययन यात्राओं और व्यावहारिक अनुभवों का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है।

उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी मीडिया संस्थानों, संसद, न्यायालय, ऐतिहासिक स्थलों तथा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर कार्यप्रणाली को निकट से समझते हैं, तब कक्षा में प्राप्त ज्ञान वास्तविक जीवन के अनुभव में परिवर्तित हो जाता है। इस पत्रिका का प्रत्येक पृष्ठ विद्यार्थियों के इन्हीं अनुभवों, सीख और जिज्ञासाओं का प्रतिबिंब है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय, कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, परीक्षा नियंत्रक दीप्ति मिश्रा, डॉ. श्रीराम त्रिपाठी, डॉ. वैष्णवी शुक्ला, डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय,अनिरुद्ध पाण्डेय, पुलकित जायसवाल, साजिया, समर प्रताप सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।