Movie prime

सावन के अंतिम सोमवार पर बाबा विश्वनाथ का रुद्राक्ष श्रृंगार, डेढ़ लाख रुद्राक्ष से सजेगा दरबार

सावन के अंतिम सोमवार पर काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा का विशेष रुद्राक्ष श्रृंगार होगा। करीब डेढ़ लाख रुद्राक्ष दानों से ज्योतिर्लिंग और शिव-शक्ति की चल प्रतिमा सजाई जाएगी। छह लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए मंदिर प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं।
 
रुद्राक्ष श्रृंगार
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

वाराणसी: सावन के अंतिम सोमवार पर काशी में बाबा विश्वनाथ के दिव्य रुद्राक्ष स्वरूप के दर्शन होंगे। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा का विशेष रुद्राक्ष श्रृंगार किया जाएगा। करीब डेढ़ लाख रुद्राक्ष दानों से ज्योतिर्लिंग और शिव-शक्ति की चल प्रतिमा को सजाया जाएगा। श्रृंगार के बाद आरती होगी और करीब दो घंटे तक श्रद्धालुओं को बाबा के इस विशेष स्वरूप की झांकी के दर्शन कराए जाएंगे।

सावन के अंतिम सोमवार पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। अनुमान है कि मंगला आरती से लेकर शयन आरती तक छह लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ का दर्शन और जलाभिषेक कर सकते हैं। मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र के अनुसार, सावन के प्रत्येक सोमवार को औसतन 5.50 लाख श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर रहे हैं। सामान्य दिनों में भक्तों को करीब 25 से 30 मिनट में दर्शन मिल रहे हैं।

आठ से 10 घंटे में तैयार होगा रुद्राक्ष श्रृंगार

बाबा विश्वनाथ के रुद्राक्ष श्रृंगार की तैयारी सोमवार दिन में ही शुरू कर दी जाएगी। चल प्रतिमा को रुद्राक्ष से सजाने में करीब आठ से 10 घंटे का समय लगेगा। शाम तक प्रतिमा को रुद्राक्ष से पूरी तरह सजा दिया जाएगा, जिसके बाद उसे गर्भगृह में ले जाया जाएगा।

मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, सभी विशेष श्रृंगारों में रुद्राक्ष श्रृंगार को सबसे कठिन और खास माना जाता है। बड़ी संख्या में रुद्राक्ष दानों से बाबा के इस स्वरूप को तैयार किया जाता है।

छह गेट से होगी श्रद्धालुओं की एंट्री, गंगा द्वार बंद रहेगा

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर में प्रवेश और निकास की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। गंगा द्वार से श्रद्धालुओं का आवागमन नहीं होगा। इसके अलावा छह गेट से श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।

मैदागिन, दशाश्वमेध घाट, चौक, गोदौलिया, बांसफाटक गेट नंबर-4, काशी द्वार 4बी, नंदूफेरिया, सिल्को गली और सरस्वती फाटक की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश व्यवस्था की गई है।

गोदौलिया से मैदागिन तक नो-व्हीकल जोन रहेगा, ताकि पैदल आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनी रहे।

बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए गोल्फ कार्ट

विशेष श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निशुल्क गोल्फ कार्ट की व्यवस्था की गई है। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालु इनका इस्तेमाल कर सकेंगे। मंदिर परिसर में तीन चिकित्सा सहायता केंद्र बनाए गए हैं। जरूरत पड़ने पर निशुल्क एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

श्रद्धालुओं की सहायता के लिए बहुभाषी कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा खोया-पाया केंद्र बनाया गया है और सात स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं।

सुरक्षा के लिए अस्थायी पुलिस चौकियां, ड्रोन से निगरानी

भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। मंदिर और आसपास के इलाकों में कई अस्थायी पुलिस चौकियां बनाई गई हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कांवड़ मार्ग पर लगातार पेट्रोलिंग के साथ अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी।

रविवार रात से ही लगने लगी श्रद्धालुओं की कतार

बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार रविवार रात से ही लगनी शुरू हो गई थी। रविवार शाम से कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भीड़ गंगा घाटों और शिविरों में बढ़ने लगी। सोमवार भोर में श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया जाएगा। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, पूरे सावन में करीब 80 लाख श्रद्धालुओं के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचने का अनुमान है।

27 अगस्त को होगा बाबा का झूला श्रृंगार

सावन के अंतिम सोमवार के रुद्राक्ष श्रृंगार के बाद बाबा विश्वनाथ का अगला विशेष श्रृंगार 27 अगस्त को होगा। इस दिन बाबा का झूला श्रृंगार किया जाएगा। सावन के दौरान होने वाले इन विशेष आयोजनों को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी पहुंच रहे हैं।