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काशी बनेगी इको-टूरिज्म हब! झरनों, किलों और जंगल सफारी से पर्यटकों को लुभाने की तैयारी

गर्मी के सीजन में घटते पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वाराणसी में इको-टूरिज्म और हेरिटेज टूरिज्म को जोड़ने की तैयारी है। भारत पर्यटन ने देवदरी, राजदरी, चुनार किला जैसे स्थलों को शामिल करते हुए नया प्लान बनाया है, जिससे विदेशी पर्यटकों को पूर्वांचल की विरासत से जोड़ा जाएगा।

 
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वाराणसी: गर्मी के मौसम में आमतौर पर पर्यटकों की संख्या में गिरावट देखने को मिलती है, लेकिन इस बार काशी को सालभर पर्यटकों से गुलज़ार रखने के लिए भारत पर्यटन विभाग ने एक विशेष रणनीति तैयार की है। इस योजना के तहत इको-टूरिज्म और हेरिटेज टूरिज्म को जोड़कर पर्यटकों को एक नया अनुभव देने की तैयारी की जा रही है।

पर्यटन विभाग का मानना है कि काशी केवल धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि इसके आसपास के जिलों में प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों का एक समृद्ध खजाना मौजूद है, जिसे अब तक व्यापक स्तर पर प्रमोट नहीं किया जा सका है। इसी कमी को दूर करने के लिए अब एक मास्टर प्लान पर काम किया जा रहा है।

भारत पर्यटन के सहायक निदेशक पावस प्रसून के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य गर्मी के मौसम में भी पर्यटकों की संख्या को स्थिर बनाए रखना है। इसके तहत खासतौर पर विदेशी पर्यटकों को पूर्वांचल के अनछुए और कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से परिचित कराया जाएगा।

इस प्लान में देवदरी, राजदरी, लखनिया दरी, चंद्रप्रभा वन, चुनार किला जैसे प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को प्रमुखता दी गई है। ये स्थान अपनी खूबसूरती और विरासत के लिहाज से देश के अन्य प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को टक्कर देते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में अभी तक पर्यटन के नक्शे पर पूरी तरह उभर नहीं पाए हैं।

पर्यटन अधिकारियों का कहना है कि सोनभद्र और चंदौली के झरने, मेघालय के चेरापूंजी और कर्नाटक के जोग फॉल्स से भी अधिक आकर्षक हैं। इसके अलावा, मिर्जापुर और सोनभद्र के प्राचीन किले, विंध्यवासिनी धाम और जौनपुर की ऐतिहासिक इमारतें भी इस योजना का हिस्सा होंगी।

योजना के तहत वाराणसी से इन सभी स्थानों तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाएगा। साथ ही, साइनज सिस्टम को भी अपडेट किया जाएगा ताकि पर्यटकों को मार्गदर्शन में कोई परेशानी न हो।

पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए एक विशेष गाइड बुक भी तैयार की जाएगी, जिसमें इन सभी स्थलों की जानकारी, इतिहास और यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी शामिल होगी। इससे पर्यटकों को एक संगठित और सुगम यात्रा अनुभव मिल सकेगा।

इस पहल का उद्देश्य काशी को केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित न रखते हुए एक व्यापक पर्यटन हब के रूप में विकसित करना है, जहां इको-टूरिज्म और हेरिटेज टूरिज्म का अनूठा संगम देखने को मिले।