काशी के घाट, मंदिर और विरासत स्थलों का होगा कायाकल्प, करखियां झील बनेगी इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन
वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी मंडल को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का और बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। गुरुवार को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमित अभिजात ने वाराणसी में आयोजित समीक्षा बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 109.20 करोड़ रुपये की लागत वाली 36 पर्यटन परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर और चंदौली में प्रस्तावित पर्यटन परियोजनाओं की प्रगति, नई योजनाओं और निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा की गई। सरकार का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करना है।
वाराणसी में सबसे ज्यादा 22 परियोजनाएं
प्रस्तावित 36 परियोजनाओं में सबसे अधिक 22 परियोजनाएं वाराणसी, 6 जौनपुर, 5 गाजीपुर और 3 चंदौली में प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं के तहत मंदिरों, घाटों और ऐतिहासिक स्थलों का सौंदर्यीकरण, बुनियादी सुविधाओं का विकास और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
घाट, मंदिर और ऑडिटोरियम होंगे आकर्षण का केंद्र
वाराणसी की प्रमुख परियोजनाओं में सती माई मंदिर, रामबाग मंदिर, रोहनिया स्थित शिवधाम मंदिर, पौहारी बाबा मंदिर, निर्माण दास बाबा कुटी और भगवान राम-जानकी महावीर मंदिर का विकास शामिल है।
इसके अलावा शिवपुर के सराय मोहनाघाट पर करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी घाट बनाया जाएगा। वहीं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से एक हजार लोगों की क्षमता वाला आधुनिक ऑडिटोरियम बनाने और 'परंपरा केंद्र' विकसित करने की योजना भी समीक्षा के केंद्र में रही। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर दिशा-सूचक साइनेज लगाने का भी प्रस्ताव है।
अन्य जिलों में भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
गाजीपुर में बूढ़े महादेव मंदिर, हनुमान चौतरा और हथियाराम मठ के विकास, चंदौली में विश्वकर्मा मंदिर, दुखहरण महादेव मंदिर और काली माता मंदिर के सौंदर्यीकरण पर चर्चा हुई। वहीं जौनपुर में गोमतेश्वर महादेव धाम, मां वैष्णो देवी धाम और राधा-कृष्ण मंदिर समेत छह प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास की योजना पर विचार किया गया।

विरासत संरक्षण पर भी विशेष जोर
बैठक में संस्कृति विभाग की परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। वाराणसी के बत्तीस खंभा, गुरुधाम मंदिर और पंचो शिवाला जैसे ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार पर विस्तार से चर्चा हुई, ताकि इन धरोहरों को पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जा सके।
संत रविदास और मुंशी प्रेमचंद संग्रहालय की समीक्षा
निर्माणाधीन परियोजनाओं में रोहनिया में बनने वाले संत रविदास संग्रहालय, गाजीपुर स्थित शहीद वीर अब्दुल हमीद स्मारक और मुंशी प्रेमचंद स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुंशी प्रेमचंद संग्रहालय परियोजना फिलहाल टेंडर प्रक्रिया में है।
करखियां झील बनेगी इको-टूरिज्म हब
बैठक में वाराणसी के पिंडरा क्षेत्र स्थित करखियां झील को लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। योजना के तहत झील की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
समय पर पूरे हों सभी कार्य
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं तय समय सीमा और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि एक करोड़ रुपये तक की सभी स्वीकृत निर्माणाधीन परियोजनाएं नवंबर 2026 तक पूरी कर ली जाएं। वहीं अपर मुख्य सचिव अमित अभिजात ने विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेशभर में विरासत आधारित और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
