काशी की खेल विरासत को मिलेगा नया मंच, प्रदेश का पहला ओलिंपियन पार्क बनाने की तैयारी
वाराणसी: आध्यात्म, संस्कृति और विरासत की नगरी काशी अब खेल जगत में भी अपनी ऐतिहासिक पहचान को नए अंदाज में दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। नगर निगम की ओर से शहर में विकसित किए जाने वाले 10 थीम आधारित पार्कों की योजना के तहत ‘ओलिंपियन पार्क’ बनाने का प्रस्ताव सामने आया है। यदि यह योजना साकार होती है तो यह उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा पार्क होगा, जो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले काशी के खिलाड़ियों को समर्पित होगा।
प्रस्तावित ओलिंपियन पार्क न केवल काशी के खिलाड़ियों की उपलब्धियों का जीवंत संग्रहालय बनेगा, बल्कि देश-विदेश से आने वाले खेल प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र साबित हो सकता है। पार्क में खिलाड़ियों की जीवन यात्रा, दुर्लभ तस्वीरें, पदक, खेल उपकरण और उनके योगदान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदर्शित की जा सकती हैं।
काशी ने देश को कई ऐसे खिलाड़ी दिए हैं जिन्होंने ओलंपिक जैसे विश्व के सबसे बड़े खेल मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया। वर्ष 1948 में पहलवान अनंत राम भार्गव से शुरू हुई यह यात्रा 1952 में एथलीट गुलजारा सिंह, 1956 में पहलवान लक्ष्मीकांत पांडेय, हॉकी के जादूगर मोहम्मद शाहिद, तीरंदाज संजीव सिंह, हॉकी खिलाड़ी राहुल सिंह, एथलीट संजय राय, राम सिंह यादव, पहलवान नरसिंह यादव और हाल के वर्षों में भारतीय हॉकी टीम के प्रमुख खिलाड़ी ललित उपाध्याय तक पहुंचती है।
ललित उपाध्याय टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं। ओलिंपियन पार्क के माध्यम से नई पीढ़ी को खेलों के प्रति प्रेरित करने के साथ काशी की समृद्ध खेल परंपरा को स्थायी पहचान देने का प्रयास किया जाएगा।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि नगर निगम शहर के पार्कों को अलग-अलग थीम पर विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा, “ओलिंपियन पार्क काशी की खेल विरासत को समर्पित एक अनूठी पहल होगी। इससे खिलाड़ियों के योगदान को सम्मान मिलेगा और युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरणा मिलेगी।”
यदि यह योजना मूर्त रूप लेती है तो काशी केवल धर्म और संस्कृति की राजधानी ही नहीं, बल्कि भारतीय खेल विरासत को संजोने वाले एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी देश-दुनिया में नई पहचान स्थापित करेगी।
