Movie prime

घर बैठे सीखें संस्कृत, ज्योतिष, कर्मकांड और योग: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में ऑनलाइन दाखिले शुरू

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने सत्र 2026-27 के लिए ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। संस्कृत, ज्योतिष, कर्मकांड, योग, वास्तु और पालि भाषा सहित कई प्रमाणपत्र व डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में 5 जुलाई तक आवेदन किए जा सकते हैं।

 
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

वाराणसी: भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत भाषा और पारंपरिक विषयों में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपने ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र में विभिन्न प्रमाणपत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। इच्छुक अभ्यर्थी 10 जून से 5 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

विश्वविद्यालय की यह पहल देश ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों और संस्कृत प्रेमियों के लिए भी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि पूरी शिक्षण प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होगी।

पूरी पढ़ाई से लेकर प्रमाणपत्र तक सब कुछ होगा ऑनलाइन

ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नामांकन, प्रवेश, कक्षाएं, अध्ययन सामग्री, परीक्षा और प्रमाणपत्र वितरण तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। विद्यार्थियों को किसी भी चरण में विश्वविद्यालय आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के वित्तीय सहयोग से संचालित यह केंद्र भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने का कार्य कर रहा है। इसका उद्देश्य संस्कृत और भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर तक पहुंचाना है।

महिलाओं, नौकरीपेशा लोगों और प्रवासी भारतीयों के लिए अवसर

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह पहल विशेष रूप से महिलाओं, नौकरीपेशा लोगों, ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।

जो लोग भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, योग, ज्योतिष और कर्मकांड जैसे विषयों में रुचि रखते हैं, वे दुनिया के किसी भी कोने से घर बैठे इन पाठ्यक्रमों का लाभ उठा सकेंगे।

इन विषयों में मिलेगा प्रशिक्षण

ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक प्रो. रमेश प्रसाद के अनुसार छह माह के प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं। इनमें कर्मकांड, ज्योतिष एवं कुंडली विज्ञान, वास्तु विज्ञान, संस्कृत संभाषण (भाषा शिक्षण), योग तथा पालि भाषा प्रमुख हैं। इन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों की फीस 1500 रुपये निर्धारित की गई है।

वार्षिक डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी उपलब्ध

जो विद्यार्थी अधिक गहन अध्ययन करना चाहते हैं, उनके लिए वार्षिक डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं। डिप्लोमा स्तर पर कर्मकांड तथा ज्योतिष एवं कुंडली विज्ञान जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों की फीस 2000 रुपये निर्धारित की गई है।

विश्वविद्यालय के अनुसार वर्ष 2023 से अब तक देश-विदेश के 5,000 से अधिक विद्यार्थी इन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

वेबसाइट पर उपलब्ध है पूरी जानकारी

विश्वविद्यालय ने बताया कि इच्छुक अभ्यर्थी ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पाठ्यक्रमों का विस्तृत विवरण देख सकते हैं। वहीं से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी पूरी की जा सकती है।

रोजगारपरक पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश शुरू

इसी के साथ संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने सत्र 2026-28 के लिए रोजगारपरक पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा संचालित पत्रकारिता एवं जनसंचार विज्ञान स्नातकोत्तर डिप्लोमा तथा पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों में आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 जून 2026 निर्धारित की गई है।

मीडिया और हेरिटेज सेक्टर में करियर के अवसर

वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. शैलेश कुमार मिश्र के अनुसार इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, डिजिटल मीडिया, जनसंपर्क, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन, सांस्कृतिक संस्थानों, शोध केंद्रों, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संग्रहालयों तथा अभिलेखागारों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। दोनों रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है।

भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान देने की पहल

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की यह पहल केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत भाषा, अध्यात्म और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास भी है। ऑनलाइन माध्यम से संचालित ये पाठ्यक्रम आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं, जिससे दुनिया भर के विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ सकेंगे।