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वाराणसी पहुंचा लग्जरी क्रूज ‘गंगा विलास’, 30 पर्यटकों के साथ काशी में डाला डेरा, बाबा विश्वनाथ के दर्शन और गंगा आरती का लेंगे आनंद
 

 
 वाराणसी पहुंचा लग्जरी क्रूज ‘गंगा विलास’, 30 पर्यटकों के साथ काशी में डाला डेरा, बाबा विश्वनाथ के दर्शन और गंगा आरती का लेंगे आनंद
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वाराणसी। दुनिया की सबसे लंबी नदी यात्रा के लिए प्रसिद्ध स्वदेशी लग्जरी रिवर क्रूज ‘गंगा विलास’ एक बार फिर काशी पहुंच गया है। कोलकाता से रवाना होकर गाजीपुर के रास्ते वाराणसी पहुंचे इस क्रूज में जर्मनी, स्विट्जरलैंड समेत विभिन्न देशों के पर्यटक सवार हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्रूज में कुल 30 पर्यटक यात्रा कर रहे हैं। विदेशी मेहमान काशी प्रवास के दौरान शहर की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होंगे।

बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ गंगा आरती में होंगे शामिल

काशी में तीन रात और दो दिन के निर्धारित प्रवास के दौरान पर्यटक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। इसके अलावा भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ का भ्रमण कर वहां की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों को देखेंगे।

विदेशी मेहमान दशाश्वमेध घाट पर विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में भी शामिल होंगे। इस दौरान उन्हें काशी की प्राचीन परंपराओं, आध्यात्मिक माहौल और गंगा घाटों की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।

पर्यटकों के स्वागत और भ्रमण की तैयारियां

क्रूज के वाराणसी आगमन को लेकर मल्टी मॉडल टर्मिनल पर आवश्यक तैयारियां की गई हैं। पर्यटकों के शहर भ्रमण और प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

क्रूज संचालन से जुड़ी कंपनी हेरिटेज रिवर जर्नी (अंतरा) के चेयरमैन राज सिंह के मुताबिक, पर्यटकों को काशी के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। वापसी में कोलकाता जाने वाले 17 यात्रियों में 12 विदेशी और पांच भारतीय पर्यटक शामिल होंगे।

2023 में प्रधानमंत्री मोदी ने दिखाई थी हरी झंडी

लग्जरी रिवर क्रूज ‘गंगा विलास’ की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत 13 जनवरी 2023 को वाराणसी से हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसे हरी झंडी दिखाकर असम के डिब्रूगढ़ के लिए रवाना किया था।

उस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और तत्कालीन केंद्रीय जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी कार्यक्रम से जुड़े थे। क्रूज की पहली यात्रा में स्विट्जरलैंड के 32 पर्यटक शामिल थे। लगभग 3,200 किलोमीटर की इस यात्रा के लिए 51 दिनों का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था।

भारत-बांग्लादेश की नदियों से होकर गुजरता है क्रूज

‘गंगा विलास’ का अंतरराष्ट्रीय नदी मार्ग भारत और बांग्लादेश की कई प्रमुख नदियों से होकर गुजरता है। इनमें गंगा, भागीरथी, हुगली, पद्मा, मेघना, जमुना और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियां शामिल हैं।

क्रूज उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम के साथ बांग्लादेश के नदी मार्गों से भी गुजरता है। इसकी यात्रा में ऐतिहासिक शहरों, धार्मिक स्थलों, प्राकृतिक विरासत और नदी किनारे बसे क्षेत्रों को देखने का अवसर मिलता है।

तीन डेक और 18 लग्जरी सुइट वाले इस क्रूज में 36 पर्यटकों के ठहरने की क्षमता है। इसकी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा में भारत और बांग्लादेश के 27 नदी तंत्रों को शामिल किया गया था।

काशी के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

‘गंगा विलास’ जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के रिवर क्रूज का वाराणसी आगमन शहर में नदी पर्यटन की संभावनाओं को मजबूत करता है। विदेशी पर्यटकों के भ्रमण से काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने के साथ स्थानीय पर्यटन कारोबार को भी लाभ पहुंचने की उम्मीद है।

संपादकीय तथ्य-जांच: 25 अक्टूबर 2026 की एक प्रकाशित रिपोर्ट में गाजीपुर पहुंचे क्रूज पर 15 विदेशी पर्यटकों का उल्लेख है, जबकि उपलब्ध कराई गई सूचना में वाराणसी आगमन पर कुल 30 पर्यटक बताए गए हैं। ताजा यात्री संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। 2023 की उद्घाटन यात्रा का विवरण सरकारी स्रोतों से पुष्ट है।